8 Comments

  1. थोड़ा निहारने दो
    कुदरत की छवि मुझे तुम
    तुम भी निहार लो ना…
    भेजी सुंगध वन में
    भेजी उमंग मन में
    शोभा सुबह की ऐसे
    उल्लास लाई मन में।
    __________ संपूर्ण कविता काव्य सौंदर्य लिए हुए बहुत ही मधुर है।
    प्रकृति के सौंदर्य का संपूर्ण दर्शन है आपकी कविता में। बहुत सुंदर शिल्प बहुत सुंदर भाव, लाजवाब अभिव्यक्ति एवम् अद्भुत लेखन , वाह!

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