बेटी को घर की लक्ष्मी और बेटे को घर का कुलदीपक बुलाते हैं,
आए जब भी बेटी और बेटे का जन्म दिवस,
बड़ी धूमधाम से जन्मदिन मनाते हैं,
हुई सजावट रंग-बिरंगे गुब्बारों से,
मंगाया सुंदर सा केक,केक पर मोमबत्तियां भी जलाते हैं,
दादी बुआ चाची ताई
एक कोशिश बिना मोमबत्ती बुझाए जन्मदिन मनाने की
Comments
7 responses to “एक कोशिश बिना मोमबत्ती बुझाए जन्मदिन मनाने की”
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वाह बहुत खूब
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सादर आभार
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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विचारणीय लेखन
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धन्यवाद
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भारतीय संस्कृति के अनुरूप जन्म दिवस मनाने की चेष्टा को रखती एकता जी की बहुत ही सुंदर कविता
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धन्यवाद अमिता जी
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