देखो बरस रही ठंडी फुहार,
बदलियां भर आई।
काले-काले मेघा उमड़ घुमड़ रहे,
गरज गरज कर शोर सुना रहे,
फिर दामिनी तड़की आया झंझावात,
बदलियां भर आई।
वन में नाचे मोर -मोरनी,
प्रकृति का कैसा यह रूप मोहनी,
कुहू -कुहू बोले काली कोयल,
पपीहे ने छोड़ी मधुरिम तान,
बदलियां भर आई।
बरखा की रिमझिम संग गिरते ओले,
ओले देखकर बच्चे बोले,
नन्हे-नन्हे हाथों से बच्चे छूते ओले,
बारिश ने मिटाया संताप,
बदलियां भर आई।।
मेघा उमड़ -घुमड़ कर आए
Comments
5 responses to “मेघा उमड़ -घुमड़ कर आए”
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वाह क्या बात है
बरसात का मनोरम चित्रण किया है आपने -
बहुत सुंदर
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अतिसुंदर भाव
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बहुत सुंदर प्रस्तुति
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प्राकृतिक छटा का बहुत ही सुंदर तथा मनोरम चित्रण
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