फूलों से भी प्यारा लगता
रिश्तों का यह मेला
जिन रिश्तों ने मुझको पाला
दिया जीवन को नया सवेरा
कुछ रिश्ते दम घोंट रहे
जो स्वार्थ की करते
सवारी हैं
जो देते हैं मुझे प्रेरणा
हम उनके आभारी हैं।।
“रिश्तों का यह मेला”
Comments
4 responses to ““रिश्तों का यह मेला””
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर भाव
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Nice
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