एकाकीपन…

दिल के दर्मियां कुछ जख्म
हरे हो रहे हैं
वो हमारे और करीब हो रहे हैं
वह अब यह नहीं जानते
इन रिश्तों से मेरा दम घुटने लगा है
हमें अब उनके सहारे से ज्यादा, एकाकीपन भाने लगा है।।

Comments

5 responses to “एकाकीपन…”

  1. अतिसुंदर रचना 

    1. आभार है

  2. Ekta

    Very good

  3. बहुत सुंदर रचना

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