कोरोना महामारी पर आल्हा(२)

घर की फुलवारी उजड़ गयी,सब गलियां सूनी हुई जांय,
हंसी ठिठोली अपना सुनावे,सुनने को कान तरस है जाय,
इस महामारी से बचने को एकै उपाय यही सुझाय,
दो गज दूरी मास्क जरूरी, सब जन लेव नियम अपनाय,
वैक्सीनेशन करवा लेव भइया,अपना भविष्य तुम लेव बचाय,
करौ प्रार्थना अपने ईश्वर से,महामारी से हमको निजात दिलाय,
डर दहशत से हम सब उबरे,
अच्छे दिन फिर जल्दी आंय।।

Comments

10 responses to “कोरोना महामारी पर आल्हा(२)”

  1. Rishi Kumar

    बहुत बहुत सुन्दर

    1. Amita

      समीक्षा हेतु आपका धन्यवाद

  2. Ekta

    अति सुंदर प्रस्तुति

    1. Amita

      समीक्षा हेतु धन्यवाद

  3. अति शोभनीय

    1. Amita

      आपका अभिनंदन है

  4. वाह बहुत सुंदर 

    1. Amita

      Thank u sir

  5. घर की पुरानी गुजर गई बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति

  6. Pragya

    घर की फुलवारी उजड़ गई बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति तथा यथार्थ चित्रण

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