सावन का आँगन

सावन में आज फिर
बहे प्रेम की धार
गा रहे कवि सभी
मीठा मीठा राग
मीठा मीठा राग गायें
मिल सभी कविजन,
ना मन हो छोटा
यह है सावन का आँगन
बिना अनर्गल बातों में आये
लिखो कहानी
जो पढ़कर बच्चा बच्चा,
हर्षित हो राजधानी।।

Comments

6 responses to “सावन का आँगन”

  1. अतिसुंदर अभिव्यक्ति 

    1. धन्यवाद 

  2. Ekta

    बहुत सुंदर

  3. राकेश

    उत्साहपूर्ण रचना

    1. Pragya

      धन्यवाद

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