पछताएगे नहीं

मुश्किलों का दौर है घबराए गे नहीं घर के बाहर अभी जाएगे नहीं
छुआ छूत की बीमारी आई है
सावधान रहेगे तो पछताएगे नहीं

Comments

3 responses to “पछताएगे नहीं”

  1. बिल्कुल सही लिखा है आपने

  2. यथार्थ तथा समसामयिक रचना

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