सांसे मोम सी पिघलती हैं

क्या कहूँ कहने
को बहुत कुछ है
आंखों में तू,
दिल में तू है
दिल की धड़कनों में
आवाज सी आती है
सांसें मोम सी पिघल जाती हैं
रूबरू जब भी तू होता है
सच कहूँ मेरा दिल रोता है।

Comments

4 responses to “सांसे मोम सी पिघलती हैं”

  1. राकेश पाठक

    Omygod

    1. Pragya

      धन्यवाद

    1. धन्यवाद 

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