रोज रोज बढ़ते रहे
मंजिल की ओर कदम
निस दिन किया प्रयास फिर
कैसे गिनते दिन
कैसे गिनते दिन
जब परीक्षा सिर पर थी
प्रण कर लिया था
आगे बढ़ने का,
ऐसी ही जिद थी
हुई परीक्षा आया परिणाम
पाया हमने सबका मान ।।
मंजिल की ओर कदम
Comments
2 responses to “मंजिल की ओर कदम”
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वाह
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धन्यवाद
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