“देह की उर्मियाँ”

आसमानी रंग में
अब तो रंगी दुनिया
नेह के दीपक तले
जल रही तनहाईयाँ
दूधिया रोशनी में सज रहा प्रियतम
मेरी चुनरी ओढ़ कर
पवन ले रही अंगड़ाइयां
बारिश की बूंदों से
दिल की सज रही महफिल
अश्क तकिए पर पड़े हैं
मुस्कुरा रही हैं दह की उर्मियाँ।।

Comments

2 responses to ““देह की उर्मियाँ””

  1. राकेश

    Nice

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