बहुत दिन बीते..

दिल से नहीं निकली,
तेरे चले जाने की बात।
सुकून से नींद नहीं आई किसी रात।
बुरा वक्त बीत जाता है ,
यही सुनते आए थे..
हमारा नहीं बीत रहा है,
कैसे हुए हालात।
ऑंखों में रहती है तस्वीर तेरी,
रुठ सी गई है तक़दीर मेरी
भुला ही नहीं पाती हूँ,
तेरी याद बहुत आती है
कैसे सम्भालूँ दिल और
कैसे सम्भालूँ जज़्बात
आ जाऊँ तेरी दुनियाँ में मुझे पता बता दे,
बहुत दिन बीते..
नहीं की तुझसे कोई बात॥
____✍गीता

Comments

6 responses to “बहुत दिन बीते..”

  1. pravin

    उत्तम सृजन

    1. बहुत बहुत आभार

  2. Rohit

    Sundar rachna

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति। बहुत सुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

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