जलील तो तूने बार बार किया
पर मैं हर बार माफ करता रहा
शायद ये तेरी नासमझी होगी !
बस यही सोंचता रहा !!
पर तूने तो बेशर्मी की सारी हद
पार कर दी,
मेरी इज्जत सरे आम निलाम कर दी
अब तक चुप था क्योंकि
तू अकेले में वार करता था
मेरा बेटा है तू इस लिये सबकुछ सहता था
पर आज सहनशक्ति ने भी जवाब दे दिया
आज तूने अपने बाप को जिन्दा ही मार दिया।।
“सहनशक्ति”

Comments
2 responses to ““सहनशक्ति””
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ह्रदय स्पर्शी रचना
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धन्यवाद
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