हृदय की धड़कने

नयनों की पुतलियां
झपकी अनेक बार
हृदय की धड़कनें
धड़की अनेक बार,
पंजों के मोड़ जाने
कब-कब खुले जुड़े
सच्चे के सामने कब
कर खुले जुड़े।
साँसें स्वयं चली,
आशा कभी बनी
आशा कभी गली,
पाने को प्रेम मन यह
फिरता रहा गली।

Comments

One response to “हृदय की धड़कने”

  1. Praduman Amit

    वाह क्या कहने

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