प्रेम ही जीवन

मत करना वो बात कि जिससे
ठेस लगे सचमुच में,
प्रेम ही जीवन, प्रेम ही सब कुछ,
प्रेम-बोल हो मुख में।
वो होते हैं सच्चे साथी
साथ रहें जो दुख में,
जो हों दुःख में साथ उन्हें ही
साथ रखें हम सुख में।

Comments

2 responses to “प्रेम ही जीवन”

  1. Geeta kumari

    अति उत्तम और सुन्दर रचना

  2. Geeta kumari

    अति सुन्दर पंक्तियाँ

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