दिल हमारा टूटा हुआ सा हो गया,
जब अपनी राह वो जाने लगे।
चाह कर भी रोक पाये हम नहीं,
रोकने को उन्हें, ऑंखों के अश्क़ आने लगे।
कब तलक देते सहारा वो हमें,
अश्कों को हम यही समझाने लगे॥
____✍गीता
टूटा सा दिल

Comments
3 responses to “टूटा सा दिल”
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प्रतिदिन का सूरज शाम को डूब जाता है
निराश ना हो,
कल फिर दिन रोशन करने आएगा।-
सुंदर समीक्षा हेतु बहुत आभार राकेश जी
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कब तलक देते सहारा वो हमें,
अश्कों को हम यही समझाने लगे
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