मुखौटे लगा कर घूम रहे बहुत आदमी हैं।
किसी ने मुखौटा लगा कर हॅंसाया,
किसी ने मुखौटा लगा कर डराया।
कोई रो रहा है मुखौटा लगा कर,
किसी ने मुखौटा लगा कर सताया।
असली और नकली की पहचान हुई दुष्कर,
नकली पर असली का मुलम्मा चढ़ाया।
मुखौटों के नगर में हर कदम पर है धोखा,
जिसको मिला मौका उसी ने उठाया।
बकरी घूम रही है शेर का मुखौटा लगा कर,
भेड़िये ने भेड़ का मुखौटा है लगाया।
✍️गीता कुमारी
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