Ajay Amitabh Suman's Posts

आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है

सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना  गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शांत, मृदुभाषी और विनम्र रह पाते हैं।  कितने लोग इंसान रह पाते हैं? बड़ा मुश्किल होता है , आदमी का आदमी बने रहना। रोज उठकर सबेरे पेट... »

मंजिल का अवसान नहीं

एक व्यक्ति के जीवन में उसकी ईक्क्षानुसार घटनाएँ प्रतिफलित नहीं होती , बल्कि घटनाओं को  प्रतिफलित करने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। समयानुसार झुकना पड़ता है । परिस्थिति के अनुसार  ढ़लना पड़ता है । उपाय के रास्ते अक्सर दृष्टिकोण के परिवर्तित होने पर दृष्टिगोचित होने लगते हैं। बस स्वयं को हर तरह के उपाय के लिए खुला रखना पड़ता है। प्रकृति का यही रहस्य है , अवसान के बाद उदय और श्रम के बाद विश्राम।  इस सृष्... »

प्रमाण

अनुभव  के अतिरिक्त कोई आधार नहीं , परमेश्वर   का   पथ   कोई  व्यापार  नहीं। प्रभु में हीं जीवन कोई संज्ञान  क्या लेगा? सागर में हीं मीन भला  प्रमाण क्या  देगा? खग   जाने   कैसे  कोई आकाश  भला? दीपक   जाने  क्या  है  ये  प्रकाश भला? जहाँ  स्वांस   है  प्राणों  का  संचार  वहीं, जहाँ  प्राण  है  जीवन  का आधार  वहीं। ईश्वर   का   क्या  दोष  भला   प्रमाण में? अभिमान सजा के तुम हीं हो अज्ञान में। परमेश्... »

जात आदमी के

आसाँ   नहीं   समझना  हर  बात आदमी के, कि  हँसने  पे  हो  जाते वारदात आदमी  के। सीने   में  जल रहे है  अगन  दफ़न  दफ़न से , बुझे   हैं  ना   कफ़न  से अलात आदमी   के? ईमां   नहीं   है जग   पे  ना खुद पे  है  भरोसा, रुके  कहाँ   रुके  हैं  सवालात   आदमी  के? दिन   में   हैं    बेचैनी  और रातों को  उलझन, संभले    नहीं     संभलते   हयात  आदमी के। दो   गज    जमीं      तक   के छोड़े ना अवसर, ख्वाहिशें    बहु... »

सबकुछ ये सरकार खा गई

राशन   भाषण  का  आश्वासन  देकर कर  बेगार  खा गई। रोजी रोटी लक्कड़ झक्कड़ खप्पड़ सब सरकार खा गई।   देश   हमारा   है    खतरे   में,   कह    जंजीर    लगाती   है। बचे   हुए   थे  अब तक जितने, हौले से अधिकार खा गई। खो खो  के घर  बार जब अपना , जनता  जोर  लगाती है। सब्ज बाग से  सपने देकर , सबके  घर  परिवार  खा गई। सब्ज  बाग  के  सपने    की   भी,  बात  नहीं  पूछो   भैया। कहती  बारिश बहुत हुई है, सेतु, सड़क, क... »

2021

अंधकार  का  जो साया था,  तिमिर घनेरा जो छाया था, निज निलयों में बंद पड़े  थे, रोशन दीपक  मंद पड़े थे। निज  श्वांस   पे पहरा  जारी,   अंदर   हीं   रहना  लाचारी , साल  विगत था अत्याचारी, दुख के हीं तो थे अधिकारी। निराशा के बादल फल कर, रखते  सबको घर के अंदर, जाने  कौन लोक  से  आए, घन घोर घटा अंधियारे साए। कहते   राह  जरुरी  चलना , पर नर  हौले  हौले  चलना , वृथा नहीं हो जाए वसुधा , अवनि पे हीं तुझको फलन... »

अभिलाष

अभिलाष जीवन  के   मधु प्यास  हमारे, छिपे किधर  प्रभु  पास हमारे? सब कहते तुम व्याप्त मही हो, पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो? नाना शोध करता रहता  हूँ, फिर भी  विस्मय  में रहता हूँ, इस जीवन को तुम धरते हो, इस सृष्टि  को  तुम रचते हो। कहते कण कण में बसते हो, फिर क्यों मन बुद्धि हरते हो ? सक्त हुआ मन निरासक्त पे, अक्त रहे हर वक्त भक्त  पे । मन के प्यास के कारण तुम हो, क्यों अज्ञात अकारण तुम हो? न  तन ... »

गेहूँ के दाने

गेहूँ       के   दाने    क्या   होते, हल   हलधर  के परिचय देते, देते    परिचय  रक्त   बहा  है , क्या हलधर का वक्त रहा है। मौसम   कितना  सख्त रहा है , और हलधर कब पस्त रहा है, स्वेदों के  कितने मोती बिखरे, धार    कुदालों   के  हैं निखरे। खेतों    ने  कई   वार  सहें  हैं, छप्पड़  कितनी  बार ढ़हें  हैं, धुंध   थपेड़ों   से   लड़   जाते , ढ़ह ढ़ह कर पर ये गढ़ जाते। हार   नहीं   जीवन  से  माने , रार   यहीं   म... »

कैसे कहूँ है बेहतर , ये हिंदुस्तान हमारा

कह रहे हो तुम ये , मैं भी करूँ ईशारा, सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा। ये ठीक भी बहुत है, एथलिट सारे जागे , क्रिकेट में जीतते हैं, हर गेम में है आगे। अंतरिक्ष में उपग्रह प्रति मान फल रहें है, अरिदल पे नित दिन हीं वाण चल रहें हैं, विद्यालयों में बच्चे मिड मील भी पा रहें है, साइकिल भी मिलती है सब गुनगुना रहे हैं। हाँ ठीक कह रहे हो, कि फौजें हमारी, बेशक जीतती हैं, हैं दुश्मनों पे भारी। अब नेट ... »

खुद के सहारे बनो तुम

मौजो से भिड़े हो , पतवारें बनो तुम, खुद हीं अब खुद के, सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है , आसां बहुत पर, गिर के सम्भलना है, आसां बहुत पर, डूबे हो दरिया जो, मुश्किल हो बचना, तो खुद हीं बाहों के, सहारे बनो तुम, मौजो से भिड़े हो , पतवारें बनो तुम। जो चंदा बनोगे तो, तारे भी होंगे, औरों से चमकोगे, सितारें भी होंगे, सूरज सा दिन का जो, राजा बन चाहो, तो दिनकर के जैसे, अंगारे बनो तुम, मौजो से भिड़े हो, पतवारे... »

राष्ट्र का नेता कैसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो? जो रहें लिप्त घोटालों में, जिनके चित बसे सवालों में, जिह्वा नित रसे बवालों में, दंगा झगड़ों का क्रेता हो? क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो? राष्ट्र का नेता कैसा हो? जन गण का जिसको ध्यान नहीं, दुख दीनों का संज्ञान नहीं, निज थाती का अभिज्ञान नहीं, अज्ञान हृदय में सेता हो, क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो? राष्ट्र का नेता कैसा हो? जो अनसुनी करे फरियादें , करता रहे बस खाली वादें , हो निय... »

व्यापार

दिल की जो बातें थीं सुनता था पहले, सच ही में सच था जो कहता था पहले। करने अब सच से खिलवाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। कमाई की खातिर दबाता है सब को , गिरा कर औरों को उठता है खुद को। कि जेहन में उसके जुगाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। मुनाफे की बातें ही बातें जरूरी। दिन में जरूरी , रातों को जरूरी। देख वायदों में उसके करार आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। मूल्यों सिद्धांतों की बातें हैं... »

पुलवामा

लकड़बग्घे से नहीं अपेक्षित प्रेम प्यार की भीख, किसी मीन से कब लेते हो तुम अम्बर की सीख? लाल मिर्च खाये तोता फिर भी जपता हरिनाम, काँव-काँव हीं बोले कौआ कितना खाले आम। डंक मारना हीं बिच्छू का होता निज स्वभाब, विषदंत से हीं विषधर का होता कोई प्रभाव। कहाँ कभी गीदड़ के सर तुम कभी चढ़ाते हार? और नहीं तुम कर सकते हो कभी गिद्ध से प्यार? जयचंदों की मिट्टी में हीं छुपा हुआ है घात, और काम शकुनियों का करना होता ... »

कविता बहती है

कविता बहती है कविता तो केवल व्यथा नहीं, निष्ठुर, दारुण कोई कथा नहीं, या कवि शामिल थोड़ा इसमें, या तू भी थोड़ा, वृथा नहीं। सच है कवि बहता कविता में, बहती ज्यों धारा सरिता में, पर जल पर नाव भी बहती है, कविता तेरी भी चलती है। कविता कवि की ही ना होती, कवि की भावों पे ना चलती, थोड़ा समाज भी चलता है, दुख दीनों का भी फलता है। जिसमें कोरी हीं गाथा हो, स्वप्निल कोरी हीं आशा हो, जिसको सच का भान नहीं, वो कोरे श... »

दिल का पथिक

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत, कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते। अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते, बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते। कि देख के जुनून हम वतनों की आज, जो चमन को उजाड़े फूलों के वास्ते। करते थे कल तक जो बातें अमन की, निकल पड़े है सारे शूलों के रास्ते। खाक छानता हूँ मैं अजनबी सा शहर में, क्या मिला खुदा तेरी धूलों के वास्ते। दिल का पथिक है अकेला”अमिताभ” आज, नाहक हीं चल पड़ा ... »

जय हो , जय हो नितीश तुम्हारी जय हो .

जय हो , जय हो नितीश तुम्हारी जय हो .

जय हो , जय हो, नितीश तुम्हारी जय हो। जय हो एक नवल बिहार की , सुनियोजित विचार की, और सशक्त सरकार की, कि तेरा भाग्य उदय हो, तेरी जय हो। जाति पाँति पोषण के साधन कहाँ होते ? धर्मं आदि से पेट नहीं भरा करते। जाति पाँति की बात करेंगे जो, मुँह की खायेंगें। काम करेंगे वही यहाँ, टिक पाएंगे। स्वक्षता और विकास, संकल्प सही तुम्हारा है। शिक्षा और सुशासन चहुँ ओर , तुम्हारा नारा है। हर गाँव नगर घर और डगर डगर, हर ... »