Ajeet Singh Avdan, Author at Saavan's Posts

“आरती माँ भारती की”

माँ भारती तेरी आरती । तेरी आरती माँ भारती ।। माँ भारती तेरे निगहबान सीमा प्रहरी हम पाकर अजेय वरदान डटे हैं सीमाओं पर इस कर्म-भूमि की माटी है मस्तक का टीका है कसम मिटा देंगे सब कुछ तेरी आहों पर माँ भारती तेरी आरती । तेरी आरती माँ भारती ।। देकर अपना लहू सरहदों पर जो सबक बना है देख तिरंगा गौरव-गाथा का सम्मान तना है चरण-धूलि जननी तेरी है मलहम इन घावों पर है कसम मिटा देंगे सब कुछ तेरी आहों पर माँ भारती... »

“सुझाव”

???????? ग़ज़ल ——— डगमगाती सी नाव है भाई । भाइयों में तनाव है भाई ।। याद कैसे रहे लगी दिल की । आज झूठा लगाव है भाई ।। दिल बड़ा पाक-साफ होता था । अब वहाँ भेद भाव है भाई ।। आखिरी बार पास थे कब हम । साथ बस मन मुटाव है भाई ।। दिल के रिश्ते संभालने होंगे । जो शुरू यूँ रिसाव है भाई ।। दरकने पर कगार आई तो । बीच अब क्या बचाव है भाई ।। आदमी की वज़ूददारी ही । पेश करती सुझाव है भाई ।। बात अ... »

“भीगी रातें”

???????? ————————- भीगी रातें ————— सावन को जरा खुल के इस बार बरसने दो । राजी ही नही यारा दिल और तरसने को ।। दो तीन बरस बीते कुछ प्यार भरी बातें, अक्सर ही सताती हैं कटती ही नहीं रातें । मौसम बदला बदले हालात बदलने दो, राजी ही नही यारा दिल और तरसने को ।। पाए तन्हाई में आसार खयालों के, ऐसे भीगी रातें किस तरह बिता लोगे । छें... »

“प्रतिभाओं का धनी”

???????? ————————- प्रतिभाओं का धनी ————————— सत्य-बोध के मूल-बीज को प्रकृति ने स्वयं निखारा है प्रतिभाओं का धनी आदि से भारत-वर्ष हमारा है श्वर-व्यञ्जन को गढ़कर हमने शब्द, वाक्य मे ढ़ाल दिया मन की अभिव्यक्ति ने पहली-भाषा रूपी ‘भाल’ लिया “पाणिनि” की कल्पना ने ध्वनि का सूत्रव... »

“मानव”

मानव ^^^^^^ अहंकार का पुतला बन जा तज दे भली-भला, अरे क्या करता है मानव होकर सत्य की राह चला | तू मानव रहकर क्या पाएगा दानव बन जा, दुष्कर है नम रहना सहज है मुफ्त मे तन जा || हो जाए जब पुष्टि वहम की श्रेष्ठ है सबसे तू ही उस दिन ही तेरी काया रह जाएगी न यूँ ही हर प्राणी मन मैला होगा तू ही दूध-धुला अरे क्या करता है मानव होकर सत्य की राह चला तू मानव रहकर… दुष्कर है नम… दुर्लभ तन मे वाश मिला ... »

“शब्दों के सद्भाव”

” माँ ” ——- शब्दों के सद्भाव ^^^^^^^^^^^^^^^^^^ मानवता भी धर्म है जैसे इन्सानियत मज़हबी नाम, शब्दों के सद्भाव भुलाकर जीवन बना लिया संग्राम | सच्चाई के पाठ को पढ़ कर एक किनारे दबा दिया अपनी पनपती नश्लों से ही खुद हमने ये दगा किया इन्हे बताना बताना त्याग दिया क्युँ एक ही हैं अल्लाह और राम शब्दों के सद्भाव भुलाकर जीवन बना लिया संग्राम | मालिक ने तो एक जात इन्सान की सिर्फ बनाई ... »

” देश की आश “

देश की आश ^^^^^^^^^^^^^^^^   आशा है अब आज़ादी के मैं   सपने   देख  सकूंगा, आशा  है    मै   फिर  से प्यारा भारत देश बनूंगा| आशा  मेरे      आँगन मे राहत के सुमन महकेगें, आशा है आने वाले कल को”राम-राज्य” मै दूँगा||   आज़ाद हूँ मै यह सुन-सुन के बस घुट-घुट के रोता हूँ इस आज़ादी को कैसे कहूँ किस हालत मे ढ़ोता हूँ   कलि-काल चक्र यूँ घूमा है चहुँ ओर शोर आतंक का है यूँ उग्र हुआ ह... »

कूटनीति

कूटनीति… राजनीति वट वृक्छ दबा है घात क़ुरीति की झाड़ी मे धूप-पुनीति को अम्बु-सुनीति को तरसे आँगन-बाड़ी ये कूटनीति सा कोई चोचला मध्य हमारे क्युं आया ये चिन्तन भी त्यागा हमने ह्रदय से इसको अपनाया दूर हुए भाई से भाई नीति-ज्ञान की कमी तले “सत्यमेव-जयते” भी भूले सिर्फ अनैतिक पंथ चले निजी स्वार्थ समयानुकूल निज राष्ट्र-धर्म से बड़े हुए परहित,त्याग से आदि-मूल सद्भाव अचेत हैं पड़े हुए सच्... »

प्रतिभाओं का धनी

???????? ————————- प्रतिभाओं का धनी —————————   सत्य-बोध के मूल-बीज को प्रकृति ने स्वयं निखारा है प्रतिभाओं का धनी आदि से भारत-वर्ष हमारा है   श्वर-व्यञ्जन को गढ़कर हमने शब्द, वाक्य मे ढ़ाल दिया मन की अभिव्यक्ति ने पहली-भाषा रूपी ‘भाल’ लिया “पाणिनि” की कल्पना ने ध... »