Author: Devi Kamla

  • गलत को टोकना होगा

    गलत को रोकना होगा
    गलत को टोकना होगा
    सभी को सोचना होगा,
    हो ऊंचा नाम भारत का
    स्वयं को झौंकना होगा।
    सभी को सद दिशा देकर
    सभी को देश हित में रह
    स्वयं को झौंकना होगा
    टूट को रोकना होगा।

  • जीत तक न बैठिए

    साँस है जब तलक
    तब तलक संघर्ष से
    जीतिये जहान पूरा
    जीत तक न बैठिए
    छोड़िए मत कुछ अधूरा।
    निकलिए राह में
    उठाइये कदम अपने,
    आज नहीं तो कल
    आपको मिलेगी मंजिल।
    थकिये मत, घबराइए मत
    आप निडर रहेंगे तो
    बाधाएं आपसे डरेंगी,
    कठिनाइयां सरलता बनकर
    खुद-ब-खुद राहों से हटेंगी।
    खुद की राहों का उजाला
    खुद जलकर कीजिये,
    मुश्किलों का सामना
    डटकर कीजिये।
    सब जो करें करें
    लेकिन आप कुछ
    हटकर कीजिये,
    लेकिन अपने सपने
    सच कर लीजिए।

  • ठंडक की रात है

    ठंडक की रात है,
    आसमान साफ है,
    तारे ठिठुर रहे हैं,
    लेकिन चाँद छिप गया है
    या ओढ़ कर सो गया है
    एक पक्ष के लिए।
    तारे अकेले रात काट रहे हैं,
    सुबह का इंतजार कर रहे हैं
    कुछ ही घण्टों में सुबह हो जायेगी,
    ठंड भाग जायेगी।

  • रात बीत गई

    खुल गया सवेरा
    रात बीत गई,
    उजाला हो गया
    तो बात बीत गई।
    अब नई बात हो
    भूल जा रात को
    उजाला आ गया है
    नई बात कर
    नए प्रातः को।

  • दूसरे को मक्कार कहना

    दूसरे को मक्कार कहना
    और खुद को महान मानना
    छोड़ दे इंसान, मत कर गुमान
    जीवन है संघर्ष है सब जीते हैं
    सब चलते हैं, चलने वालों को
    इस तरह गाली नहीं करते हैं।
    कलम से या मुंह से निकले अपशब्द,
    तो दूसरे के लिए नहीं
    अपने लिए ही कल की पूंजी बनते हैं,
    किसी दूसरे को अपशब्द कहे कर
    कभी महान नहीं बनते हैं।

  • चाय गरम है

    चाय गरम है,
    मीठा कम है
    जीवन में गम है
    लेकिन अपने जीने का ढंग भी
    क्या कम है।
    हमें रुला दे, वक्त में ऐसा
    कहाँ दम है।

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