चाय गरम है

चाय गरम है,
मीठा कम है
जीवन में गम है
लेकिन अपने जीने का ढंग भी
क्या कम है।
हमें रुला दे, वक्त में ऐसा
कहाँ दम है।

Comments

8 responses to “चाय गरम है”

  1. Geeta kumari

    वाह,क्या बात है कमला जी।
    चाय के समय पर चाय की कविता ने चाय पीने का मन करवा दिय।
    Ok bye मैं तो चली चाय बनाने रसोई की और…आप भी अपनी चाय का मज़ा लीजिए..🙂

  2. Suman Kumari

    गज़ब का आत्मविश्वास

  3. सुन्दर पंक्तियां

  4. जय हो, बहुत खूब, keep it up

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

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