8 Comments

  1. वाह,क्या बात है कमला जी।
    चाय के समय पर चाय की कविता ने चाय पीने का मन करवा दिय।
    Ok bye मैं तो चली चाय बनाने रसोई की और…आप भी अपनी चाय का मज़ा लीजिए..🙂

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