शाम फिर खिसक कर, निगाहों में आ गयी बांते कुछ उभरकर, आंखों में छा गयीं अब रात हो रही है, मैं कहाँ ही अकेला हूँ मैं हूँ, और लंबी रातें हैं, यादों का लंबा मेला […]

हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा फुफकारों से भरी वसुंधरा आकर उसे मिटाना होगा विष फैलाते असंख्य कालिया आकर मर्दन दिखाना होगा काट शीश को दुष्ट पापियों के सुर्दशन […]

आज आंखों ने कितना कहर ढाया होगा देखकर, फौजी बेटे का धड़ माँ का दिल भर आया होगा पिलाने को अंतिम स्नेह अमृत बुझाने को ममतामयी प्यास उसके पावन स्तनों का दूध आज फिर उतर […]

एक-एक करके चले गए, जो बने थे मेरे सब अपने क्रम-क्रम से बिखर गये वो सुन्दर रचित मेरे सपने अब तो तन्हा हूँ, तन्हाई है बाकी कुछ अब शेष नहीं सब मिट गया, इक अधंड […]

उस सूखे पेड़ पर क्या चिड़िया फिर न चहचहाएंगी सूख गया जो शजर वक्त की बेवक्त मार से क्या उस शजर की डालियाँ फिर न लहराएगी जिन्दगी बन गयी गुमसुम और, हम गुमनाम बनकर रह […]