अक्सर इल्ज़ामात पर इल्ज़ाम लगाते हैं हम बोलते नहीं, बस चुप रह जाते हैं… बता दूं.. बुरे हम नहीं, बुरा हमारा वक़्त है वो कहता है बेवफ़ाई की है कहता है बेवफ़ाई की है जिस […]

जब मेरा अंत समय है नज़दीक हो, तब आँखों में छवि मेरे बच्चों की हो, और मेरे हाथों में हाथ तेरा हो… आयी थी जिस क़दर वद्दू बनकर इस घर में, उसी जोड़े में विदा […]

दुनिया के अनजाने भीड़ भाड़ में हम ऐसे अकेले आ खड़े हैं, कोई समझे न कोई अपना अंक ये कैसी मुश्किल से जूझ रहे हैं। दुनिया और अपनी इस जंग में यारों सत्यम की लड़ाई […]

कुछ इस तरह तेरा तूझे याद किया करते हैं, सब हैं करीब, पर तेरी ही कमी महसूस किया करते हैं। ज़िक्र चलता हैं किसी ओर का, बातों ही बातों में हम तेरा किस्सा छेड़ दिया […]

दुनिया देखूं या खुद को देखूं , ये कैसी घड़ी आई हैं सब कुछ होकर भी हम अकेले, यह कैसी तन्हाई हैं ख़ुद की इच्छा मार कर मैंने, जो दुनिया संग दोस्ती बड़ाई हैं आज […]

जिसको पल-पल खोजू बाहर, ढूंढे से न मिलता हैं ऐसी भी क्या ख़ता हुई जो, हर बार आशा का दीपक बूझता हैं एक छोटी सी चाह थी मेरी, कि सबके सपने पूरे करूँ टूटा हुआ […]

रंग-बिरंगे नज़ारे हैं बेहिसाब.. खो न जाना इन नज़ारो में.. ज़रा सम्भलना, यह दुनिया हैं जनाब। साथ बैठ के खाते जिस संग, वहीं दगा कर जाते हैं और बड़ी-बड़ी बातें करते बेहिसाब, ज़रा सम्भल कर […]

जिसे पल-पल दिल से चाहा, उसका एक कतरा भी हमारा न हुआ। कसमें- वादे हमसें थे, पर खुशी का हम संग बटँवारा न हुआ। झूमते थे, ज़माने के जश्नो में जो, हम संग एक पल […]

तूझसे मिलकर लगा कि कुछ यूं जिंदगी बिताएगे कुछ तुम बोलोगे कुछ हम कहते जाएंगे यूं ही समय,दिन और ऋतु बदल गई न जाने किसकी नज़र हमारे रिश्ते को लग गई कि अब न तुझे […]

छोटी-सी ज़िंदगी में, हर कोई अपने सपनें सजाता हैं। विवाह तो सभी करते हैं… वह फौजी हैं साहब, जो आठवें वचन के साथ गृहस्थ जीवन अपनाता हैं। मात-पिता की सेवा को जो, भार्या घर छोड़े […]