गँवारा न हुआ

जिसे पल-पल दिल से चाहा,
उसका एक कतरा भी हमारा न हुआ।

कसमें- वादे हमसें थे,
पर खुशी का हम संग बटँवारा न हुआ।

झूमते थे, ज़माने के जश्नो में जो,
हम संग एक पल भी बिताना, उन्हे गँवारा न हुआ।

Comments

10 responses to “गँवारा न हुआ”

  1. Finding (Hemlata Soni)

    Thnq

  2. किसी के प्रेम का कतरा नहीं माँगा जाता और भी त्रुटियाँ हैं

  3. Satish Pandey

    क्या खूब लिखा है

  4. यह तो होता है आजकल हेमलता जी

  5. Finding (Hemlata Soni)

    Thanq

Leave a Reply

New Report

Close