कोई ख्याल है जो बस गया है दिल में इक सवाल है जो उठता रहता है बार बार जिंदगी हो रही है बसर, मगर मर रहा हूं मैं बार बार
कोई ख्याल है जो बस गया है दिल में इक सवाल है जो उठता रहता है बार बार जिंदगी हो रही है बसर, मगर मर रहा हूं मैं बार बार
कुछ हर्फ़, चंद अहसास और कुछ खारे से मोती यही सब बचा है मेरे पास, बाकी सब ले गया मेरा ‘सब कुछ’
हादसा ऐसा भी उस कूचे में कर जाऊं मैं कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं सुबह होते ही नया एक जजीरा लिख दूं आज की रात अगर तह में उतर जाऊं मैं मुन्तजिर […]
टूटता हूं फिर से जुड जाता हूं मैं पानी का आईना हूं घर से लिये हूं रात का सूरज कहने को मिट्टी का दीया हूं गले गले है पानी लेकिन धान की सूरत लहराता हूं […]
गायब हर मंजर मेरा ढूढ़े परिंदा घर मेरा जंगल में गुम फ़स्ल मेरी नदी में गुम पत्थर मेरा दुआ मेरी गुम सर सर में भंवर में गुम महवर मेरा नाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे […]
तेरी सदा का है सदयों से इन्तेजार मुझे तेरे लहू के समंदर जरा पुकार मुझे मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ के क्या देखूं उरूजे फन! मेरी देहलीज पर उतार मुझे उबलते देखी है […]
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