एक मुक्तक श्री कलाम साहब के लिए – कोई उस खुदा को जाकर मेरा पैगाम दे दो , मेरे देश भारत को तुम उसका ईनाम दे दो ! मेरे मोला मेरे मालिक पर्वर्दीगार-ए-आलम , सारे […]
एक मुक्तक श्री कलाम साहब के लिए – कोई उस खुदा को जाकर मेरा पैगाम दे दो , मेरे देश भारत को तुम उसका ईनाम दे दो ! मेरे मोला मेरे मालिक पर्वर्दीगार-ए-आलम , सारे […]
मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…
चलो मिलकर प्रेम के कुछ रंग- ो-रस चख लो हर धर्म की परिभाषा का ये नाम रख लो गर चाहते हो हिंदुस्तान को खुशहाल देखना तो, तुम्हारे अल्लाह मुझको दे दो , तुम मेरे राम […]
चलो मिलकर प्रेम के कुछ रंग- ो-रस चख लो हर धर्म की परिभाषा का ये नाम रख लो गर चाहते हो हिंदुस्तान को खुशहाल देखना तो, तुम्हारे अल्लाह मुझको दे दो , तुम मेरे राम […]
तुम संग खेली मैंने सात रंग की होली . तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली । वो लाल रंग सिंदुर का .लगा सिर इतराई . वो रंग गुलाबी होंठ का . ले […]
मैं एेसे दरिया के किनारे बैढा हुं, हर घडी जहा से समुन्दर दिखने लगता है। ये मेरा दिल भी एक जिद्दी बुजुर्ग् जैसा है, जो रात होते ही किस्से सुनाने लगता है। […]
मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…!
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