तुम संग खेली मैंने सात रंग की होली .
तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली ।
वो लाल रंग सिंदुर का .लगा सिर इतराई .
वो रंग गुलाबी होंठ का . ले तुम मंद मंद मुस्काई।
वो अमृत-सा पानी जो कर रहा मनमानी.
युं भिगोकर चोली अपनी पास मेरे फिर आई।
तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली ।
तुम संग खेली मैंने सात रंग की होली .
तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली ।
कवि नवीन गौड 9921803580
HOLI SPECIAL BY NAVIN GOUD
Comments
7 responses to “HOLI SPECIAL BY NAVIN GOUD”
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behatreen
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nice
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thank you both of you
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Kyaa Athkhelian byaan kee Saheb … Nice
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dhanyawad bhai sahab
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बहुत सुंदर रचना
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बहुत सुंदर
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