HOLI SPECIAL BY NAVIN GOUD

तुम संग खेली मैंने सात रंग की होली .
तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली ।
वो लाल रंग सिंदुर का .लगा सिर इतराई .
वो रंग गुलाबी होंठ का . ले तुम मंद मंद मुस्काई।
वो अमृत-सा पानी जो कर रहा मनमानी.
युं भिगोकर चोली अपनी पास मेरे फिर आई।
तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली ।
तुम संग खेली मैंने सात रंग की होली .
तुम रंगो में नहाई . कि मुझसे भी अठखेली ।
कवि नवीन गौड  9921803580

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6 Comments

  1. Panna - March 30, 2016, 2:09 pm

    behatreen

  2. Anirudh sethi - March 31, 2016, 9:45 am

    nice

  3. KAVI NAVIN GOUD - March 31, 2016, 3:34 pm

    thank you both of you

  4. UE Vijay Sharma - April 3, 2016, 5:52 pm

    Kyaa Athkhelian byaan kee Saheb … Nice

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 10:57 pm

    बहुत सुंदर रचना

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