किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर , नहीं फिर प्रेम उग पाया रही दिल की ज़मी बंजर । मैं बर्षों से वही बैठा जहाँ तुमने कहा रुकना , जुदाई देख ली […]

सभी  इल्ज़ाम  शीशे  पर  ये  जग कबतक लगायेगा , भला।  नाकामियों   को   वो   यहाँ   कैसे   छुपायेगा ।   तुम्हारा  है  तुम्ही  रख  लो  उजाला  और  सूरज भी , हमारा   […]

देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी, चालबाज़ी जब हमारी कारगर हो जायेगी. देखना है खेल मुझे साफ़ पौशाको का उस दिन, भोली जनता जब कभी भी जानबर हो जायेगी. बिगडे लोगो के लिए बिगडे […]

तेरी  बुराईयों  को  हर अखबार कहता है, और  तू  है  मेरे  गाँव  को गँवार कहता है. ऐ  शहर  मुझे  तेरी सारी औकात पता है, तू  बच्ची  को भी हुश्न-ए-बहार कहता है. थक  गया है वो […]