देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी

देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी,
चालबाज़ी जब हमारी कारगर हो जायेगी.

देखना है खेल मुझे साफ़ पौशाको का उस दिन,
भोली जनता जब कभी भी जानबर हो जायेगी.

बिगडे लोगो के लिए बिगडे तरीके चाहिए जी,
बदसलूकी भी हमारी तब हुनर हो जायेगी.

दुनियाँ मानेगी लोहा फ़िर हमारा सदियों तक,
जिधर चलेगे एक हो वही डगर हो जायेगी.

ढूँढ लेंगे हम आँधेरे मे सफ़र अपना हुजूर,
सूर्य की ये रोशनी भी कम अगर हो जायेगी.

हम अकेले ही चलेंगे देश की खातिर मियाँ,
चीखती चिल्लाती दुनियाँ रहगुज़र हो जायेगी.

फ़िर चलेंगे काफिले अधिकार की लडाई के,
अखबार के बस्ते भी एक खबर हो जायेगी.

फ़िर से बदलेगा जमाना नई पीडी से यहाँ,
जब इंकलाब की ज़ुबानी घर व घर हो जायेगी.

हरेन्द्र सिंह कुशवाह
“एहसास”

Comments

8 responses to “देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी”

      1. Harendra singh kushwah "aihsas" Avatar
        Harendra singh kushwah “aihsas”

        शुक्रिया भाई पिन्टो

    1. Harendra singh kushwah "aihsas" Avatar
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      शुक्रिया भाई प्रवीन

    1. Harendra singh kushwah "aihsas" Avatar
      Harendra singh kushwah “aihsas”

      शुक्रिया भाई मनोहर

  1. Harendra singh kushwah "aihsas" Avatar
    Harendra singh kushwah “aihsas”

    शुक्रिया दोस्तो

  2. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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