क्या सही सुना था मैंने, अपना देश था सोने की चिड़िया विश्वगुरु के आसन पर आसीन , ऐसी भी थी घड़ियाँ विचार वसुधैव कुटुंबकम् का, समाया हममें अति बढ़िया उस जमीं; ऐसी तस्वीर हमारी, उजागर […]
क्या सही सुना था मैंने, अपना देश था सोने की चिड़िया विश्वगुरु के आसन पर आसीन , ऐसी भी थी घड़ियाँ विचार वसुधैव कुटुंबकम् का, समाया हममें अति बढ़िया उस जमीं; ऐसी तस्वीर हमारी, उजागर […]
हां मजदूर है; सो मजबूर हैं, उनकी क्या खता; जो घर से दूर हैं पैदल चल- चल; थक कर चूर हैं, सड़कें सारी; तपती तंदूर है, ट्रेनों में भी; भीड़ भरपूर है, सरकारों को आखिर; […]
जवानों ने खाई है, सीने पर अपने गोली ना भागे दिखाकर पीठ , प्राणों की लगा दी बोली आये दिन खेलते रहते, वो खून के रंग संग होली तब जाकर देश में बन पाती, रंगो […]
हां बहुत से रिश्ते पाये है, मैंने अपने इस जीवन में कुछ में है प्यार, कुछ में है स्वार्थ, सामने वाले के मन में लेकिन एक बंधन ऐसा है, जिसमें सिर्फ सच्चा प्यार घुला सबसे […]
कारण जिसके हर हिंदवासी, आजाद हवा में रहता है कारण जिसके आज विदेश में, सर उठा के भारत चलता है उस मां भारत के वीर पुत्र को, श्रद्धा सुमन चढ़ाने आया हूं मै उस आंधी […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.