प्यार पनपता है

प्यार पनपता है….
इक नन्हे पौधे की तरह
खोलकर महीन मिट्टी की परतों को
पाकर चंद बूंदे पानी की
खोलकर अपनी हरी बाहें
समा लेना चाहता है दुनिया को इनमें
मगर कभी कभी रूंध जाता है
दुनिया की आपाधापी में
किसी के पैरों तले|

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