Author: Pankaj

  • मेरा आज मेरा कल बनाएगा

    *मेरा आज मेरा कल बनाएगा*

    मेरा आज मेरा कल बनाएगा
    इसीलिए पढ़ो
    इसीलिए गढ़ो
    इसीलिए उठो
    बीज सा फूटो
    जर्जर हो टूटो
    स्वयं से रूठो
    स्वयं से पूछो
    मेरा दिन आखिर कब आएगा
    मेरा आज मेरा कल बनाएगा।
    आग में तपो
    बीज सा दबो
    अन्न सा पको
    बर्फ सी गलो
    घड़ी सी चलो
    नदी सी बहो
    स्वयं से कहो
    मेरा दिन आखिर कब आएगा
    मेरा आज मेरा कल बनाएगा।
    पंकज बिंदास

  • एक बार होता है

    एक बार होता है

    बार बार नही इजहार एक बार होता है
    ज़िंदगी मे भी बस प्यार एक बार होता है.

    कुछ लोग गिनाते अपनी ढेर सारी मुहब्बतें
    पर वो वाला प्यार यार एक बार होता है.

    आज हम दोनो को फुर्सत तू घड़ी मत देख
    एक हप्ते मे इतवार एक बार होता है.

    बिंदास ने जाना ये ठोकरें खा खाकर
    किसी शख्स पर एतबार एक बार होता है.
    पंकज बिंदास

  • चाहत

    चाहत

    तू ही तो है चाहत,तू ही तो है राहत,
    पंछी मैं तू, भोर की पहली किरन.
    तुझे न देखूं तो, दिल में उदासी,
    जो देखूं तुझे, दिल में आशा-किरन.
    चेहरों में इक तेरा, चेहरा सुहाना,
    मिला है इन आंखों को, ख़ुशी का खजाना,
    नज़र चेहरे से, कहती हैं कुछ तेरे,
    जैसे हिमालय से कहे, सूरज-किरन.
    दिल कहना चाहे पर धक-धक करे,
    अपना मोल अपने से कब तक करे,
    चांद तकता चकोर सा दिल बेचारा,
    इक तरफा इश्क नादांं कब तक करे,
    तू ही अब कह दे दिल से पागल हो गया,
    जो इक दरिया पर पोखर मायल हो गया
    मगर दिल फिर भी तो,आशिक दीवाना
    तुझ पे चाहता है, खुद को मिटाना
    छाए हैं बादल, मेरे इस दिल पर
    बरसो या आने दो, दिल में किरन।
    पंकज बिंदास

  • हास्य, व्यंग्य

    वोट लेने आए नेता हमको जीता दो
    अपनी भी समस्याएँ सारी हमको बता दो
    लाऊँगा मै विकास आप सबके घरों में
    मुझको उस विकास का बस पता बता दो.
    पंकज बिंदास

  • महाशिवरात्रि

    महाशिवरात्रि

    महादेव शिव भोले की है, महारात्रि भक्तों आई,
    पावन दिन माँ गौरी जी हैं, अपने पति शिव को पाई,
    शिवत्व शिखर चेतना का है, क्यों न सभी हम पा जाएँ,
    कर कठिन तपस्या गौरी सी, निर्विकार हम हो जाएँ.
    पंकज बिंदास

  • मजबूरियाँ

    मजबूरियाँ

    कभी कसमें खिलाती थी मुझे ना दूर जाना तुम
    सदा ही साथ में रह के महक बन फूल जाना तुम
    मगर मजबूरियाँ कैसी जुदा जो हो गए पल में
    लिखा ख़त में मुझे अंतिम कि मुझको भूल जाना तुम.

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