आज तो तुम्हें भी मेरी याद आई होगी जब तुमने मेरा इंतजार किया होगा और मैंने तुम्हें याद ही नहीं किया कमी महसूस हुई होगी जब तुम्हें मेरी जरूरत थी और हम बहुत दूर खड़े […]

किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।

बीती रात मैं तेरी यादों के आगोश में जाने लगी विरह की वेदना से मन को तड़पाने लगी आँसुओ से भीगा लतपत तन मेरा ओर मन मेरा सेज की सिलवट और नर्मी रूह को जलाने […]

खुशबू चमन में बिखरी जा रही है धूप की लौ बढ़ती जा रही है । हवा ने खोल दीये हैं आसमान के पंख जमीं सा हम मिलते जा रहे हैं