चंद दिन बचे हैं हम दूर चले जायेंगे कहे दे रहे हैं फिर लौट कर ना आएंगे
चंद दिन बचे हैं हम दूर चले जायेंगे कहे दे रहे हैं फिर लौट कर ना आएंगे
अब ना हम आयेंगे ना हमारा निशान पाओगे हमें खो कर ओ बावरे तुम बहुत पछताओगे
बन्दर पान चबाता है और भैंस जलेबी खाती है आज के युग में ऐसा ही है भलाई मारी जाती है
आज बहुत हतास हुई हूँ हमेशा ऐसा ही क्यूँ होता है मेहनत करते हैं हम पर औरों को फायदा होता है
आज तो तुम्हें भी मेरी याद आई होगी जब तुमने मेरा इंतजार किया होगा और मैंने तुम्हें याद ही नहीं किया कमी महसूस हुई होगी जब तुम्हें मेरी जरूरत थी और हम बहुत दूर खड़े […]
वो मेरे जनाज़े के इंतजाम में लगे हैं उन्हें बता दे कोई कि अभी भी हम मरे नहीं बाकी है हममें सब्र आज भी।
वैसे माफ भी कर देते तुम्हें मगर तुमने इतने सितम किए कि अब माफ करने की गुंजाइश ना रही
रूबरू तुम हुए मगर अफसोस इतना है कि मेरे हो कर भी तुम मेरे ना हुए
गुजारिश की उसने पर मैने ना सुनी शिकायत की उसने मगर मैंने ना सुनी यही सोच कर….. कि उसने भी मेरी कहां सुनी थी जब हमें उसकी जरूरत थी….
इंतिहा खत्म हुआ मेरी बेसब्री का मुलाकात भी हुई उनसे मगर कोई बात ना हुई वह आकर चले गए मगर मेरे होंठ सिले के सिले ही रह गए
तमाम इन्तज़ार के बाद वो आये थे उनकी नजरों ने बहुत शिकायतें की मेरी आँखों से
हम चिलमन से ही झांकते रह गए वो रंगने हमें आये थे पर पड़ोसन को रंग गए
खत्म इन्तज़ार हो गया वो आ तो गए बुरा हो हया का हम सामने ही ना पड़े
जुनून हद में रहे तो अच्छा है बस मुहब्बत हद से बाहर होनी चाहिए
भीग जाओगे तो और रंगीन हो जाओगे वैसे भी हो हसीं कम नहीं।
आज कर देंगे तुम्हें इस तरह रंगीन ताऊम्र याद रखोगे मेरे रंग को
सबके रंग में रंग कर आऑगे तो हमारा रंग कैसे चढ़ेगा?
इन्तज़ार की हद खत्म होने को है किस राह में बैठे हो सब्र खोने को है
गुलाबी आँखों से यूँ मत देखो इश्क की फुहार से भीगने मत दो मुझे बहुत सर्दी लगी है आज।
होली के रंग में रंग लो ए रंगरेज़ मीठे- मीठे बोल से मन हर लो ए रंगरेज़ ।
तुम्हारा इन्तज़ार है कब आओगे तुम्हारे इन्तज़ार में कोरे बैठे हैं ।
रंग मोहब्बत का ही चढा मुझ पर जो लगाया था किसी रोज़ तुमने अपने हाँथों से ना उतरा है कभी ना उतरेगा
कल मेरे घर रंग लगाने आओगे? फिर हमसे नज़रे चुराने आओगे? मागा था जो तोहफ़ा मैने तुमसे पहले वो ही प्यार तुम कल लौटाने आओगे?
किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।
बारीकियाँ होती हैं बहुत हाल-ए-दिल समझना इतना आसान नहीं कुछ इशारों में समझ जाते हैं किसी को जमाने लग जाते हैं
कल मुलाकात उनसे होगी खुशी है बहुत कुछ गुफ्तगू भी होगी उम्मीद करती हूँ
जब भी मैं मंदिर जाती हूँ बस यही इल्तिजा करती हूँ भगवान सबका भला करे और शुरुआत हो हमसे।
हम रंग नहीं खेलते कुछ बात हो गई हम राज़ नहीं खोलते कुछ बात हो गई मिली जब नज़र उनसे फिर नज़र ना हटी हम देखते ही रह गए कुछ बात हो गई
आसमान की चादर में लिपटे अनगिनत सितारे हैं कौमुदी की आँच पर कई अरमाँ सुलग रहे हैं
गुमनाम ना होने देंगे पहचान को अपनी अब छोड़ दिया शौक तुझसे दिल लगाने का ।
उनकी यादों का पीछा करते-करते हम उन तक तो पहुंच जाएंगे पर ये तो बता ए खुदा! उनके दिल तक कैसे जाएंगे।
लगे हैं वह हमसे नजरें चुराने शायद उन्हें अपनी भूल का एहसास है चलो अच्छा है पता तो चला किसी चीज का तो एहसास है मोहब्बत का ना सही, भूल का ही सही।
दिल की बातें बोलती हैं चिट्ठियां राज कितने खोलती हैं चिट्टियां भावों को जीवंत बनाती हैं, आंखों को भिगोती हैं चिट्ठियां
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद आती है तो हौसले टूट जाते हैं
गिनतियाँ करते हो मुझे याद कितनी बार करते हो हम तुम्हें कितनी दफ़ा ढूंढते हैं अपने आप में कभी ये भी गिन लिया करो ।
नज़र तो आओ कभी नज़र को नजरों से मिलाओ कभी सपने तो बहुत दिखाये तुमने, एक सपना सच कर जाओ कभी।
रात पर छाई खुमारी बौने सपने हो गये उम्र बीती तेरी आरजू में सपने सपने हो गए
बीती रात मैं तेरी यादों के आगोश में जाने लगी विरह की वेदना से मन को तड़पाने लगी आँसुओ से भीगा लतपत तन मेरा ओर मन मेरा सेज की सिलवट और नर्मी रूह को जलाने […]
चाँद छत पर से मेरे रोज़ यूं गुजरता है जैसे उसे मालूम हो कि उसी के जैसे मेरा यार दिखता है ।
तू मेरी आरज़ू था आरज़ू है और आरज़ू रहेगा । ये दिल कल भी तेरा था तेरा है और तेरा ही रहेगा ।
तमन्ना थी दिल में तुम्हें पाने की पर अफसोस तमन्ना ही रह गई ।
तुम्हारी शिकायत खुदा से करेंगे मेरी आँखों में तुम हमेशा आँसू बन के आये
कितनी दफा मैनें समझाया तुम्हें मुझें मत ठुकराओ मगर तुम ना समझे तुम ना बदले।
रास्ते में चलते हुए कुछ पीछे छोड़ देते हैं लोग । पैसे कमाने के लिए रिश्ते तोड़ देते लोग।
तुम कल मेरे घर आना जानम होली है थोड़ा घूंघट करके आना जानम होली है
तुम कल मेरे घर आना जानम होली है थोड़ा घूंघट करके आना जानम होली है
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं
खुशामदीद आपको बहुत व्यस्त हो आप थोड़ा वक्त हमें भी दे दीजिये इतना भी मशरूफ होना अच्छी बात नहीं साहिब
ज़िन्दगी की आरज़ू में मरते जा रहे हैं लोग पैसे के नाम पर क्या क्या गुनाह किये जा रहे हैं लोग
खुशबू चमन में बिखरी जा रही है धूप की लौ बढ़ती जा रही है । हवा ने खोल दीये हैं आसमान के पंख जमीं सा हम मिलते जा रहे हैं
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