महिला दिवस के अवसर पर कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति करती हूँ महिला ही है सारी दुनिया आज मै सबसे कहती हूँ । महिला का सारा जीवन समर्पण में ही बीतता है और प्यार की उम्मीद […]
महिला दिवस के अवसर पर कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति करती हूँ महिला ही है सारी दुनिया आज मै सबसे कहती हूँ । महिला का सारा जीवन समर्पण में ही बीतता है और प्यार की उम्मीद […]
पानी में भिगो कर गुलाब रखे हैं । लोगों के चेहरे पे नकाब लगे हैं । रूप की चांदनी फिरती है छतों पर खिड़कियों पर कितने लोग खड़े हैं
वक्त कटता जा रहा है दीये की लौ भी धीमी हो गई आंखों में नींद नहीं चैन नहीं हम क्या करें यही सोंचते रहे ओर सुबह हो गई
हम गरीब सही पर इज़्ज़त की खाते हैं तेरी तरह हम सरेआम मुजरा तो नहीं करते हैं ।
तू नही जानता है मेरे दिल पे क्या गुजरी है एक पथ्थर सीने पे लिये घूमती हूँ मैं
कमी कुछ भी नहीं थी मेरी आँखों में बस यार तेरे पीने-पिलाने का अंदाज़ बदल गया।
ऐतबार करने पर आते कर सकते थे मगर तुम्हें तो शौक था हमको रूसवा कर जाने का
अंज़ाम जो भी हो हम तो आगे बढ़ गए हैं तुम्हें जब से छोड़ दिया हमनें ।
कुछ नाखुश लगते हैं वो हमनें यूं ही कह दिया था एक दिन दोस्त बेवफ़ा होते हैं ।
एक दौर वो भी गुज़रा है मेरी बेखयाली का घण्टों रोते थे किसी को याद करके
मैने कहा…. मैने कहा कुछ भी नहीं उसने बहुत कुछ समझ लिया।
आंखें चार कर लो इस होली में अपने रंग में रंग लो प्रज्ञा को ना और तरसाओ होली में घर आना तो थोड़ा देर से आना बहुत सुन्दर ना लगना होली में है खास कुछ […]
कितने निर्मोही हो तुम एक बार भी नहीं सोंचते मेरे बारे में ना याद करते हो ना मिलने ही आते हो अब देखना ये हौ है तुम मुझ बिन होली कैसे मनाते हो।
थक के चूर हो चुकी हूँ तुम्हें याद करके अब और याद नहीं करना। अब बसा ले तू गैरों को घर में तेरे दिल में अब मेहमान नहीं बनना।
इतनी भी रंजिश ना मान मेरे यार कभी तो मै भी तेरे दिल की मेहमान हुआ करती थी याद कर…
तुम इस इन्तज़ार में बैठे हो हम याद करेंगे तो बता दें साहिब अब ना वो प्यार रहा ना कशिश रही ना तेरी वो दिवानी ही रही।
अपने स्वेद से सींच कर बोई थी मोहब्बत की फ़सल शक के एक झोंके ने सब बर्बाद कर दिया।
ऐसे ना मुझे तुम देखो तेरी ही दिवानी हूँ हर रात सजाती मै अपनी आंखों में पानी हूँ
कभी कभी तो वक्त मिलता है हमें अपने ज़ज्बात बयां करने का बाकी फुर्सत कहां होती है हमें उनकी यादों से।
क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी गुनाह है जब वक्त होता है तो कह सुन लेते हैं हम यारों से।
हम तो बस अपने हुनर की नुमाईश करने में लगे हुए हैं आपको कुछ गलतफहमियां हैं दूर कर लें।
चलो तुम जीत जाओ हमें हराकर यही खुशी है तुम्हारी तो हम तुमसे हार कर भी जीत जायेगें ।
रात गुजर जाती है तुम्हारे खयालातों में तुम रोज़ ही कह देते हो मिलने आऊंगा … किस गली से होकर आओगे ये भी तो बताते नहीं हो!
सुन्दर हैं तेरी आँखों के फसाने….. रोज़ कुछ सुनाते हैं आंखें बंद हो जाती हैं मगर हम देखते ही रह जाते हैं…….
श्याम मेरे तेरा साँवला रंग मेरे मन को मोह गया तू दिल में मेरे बसा रहा और आंखों का काजल बहता रहा ….
धानी चूनर ओड़ कर ब्रज में होली खेलूँगी मैं तो अपने श्याम संग राधा बनकर डोलूँगी
सदाकत की नुमाइश लगाना जरूरी है क्या मेरी वफ़ा पर यकीन करना इतना भी मुश्किल नहीं
गुमनाम सा हो गया है मेरा आशियां इन दिनों क्यूँ कि मैं तो बैठी थी तेरा घर बनाने में
रफ्ता-रफ्ता चलते जा रहे हैं मंज़िल की ओर….. खुशी तो बहुत है फकत इतना गम है हम भी तेरे जैसे होते जा रहे हैं…
गज़ब इम्तहान है मेरी बेसब्री का…. लोग उतना ही सुनाते हैं जितना हम सुनते जाते हैं….
मुझे कोरा ही रहने दो इस होली में…… क्यूँ की कुछ लोग रंग से नहीं लहू से होली खेलने में लगे हुए हैं. …… 🇮🇳जय हिंद जय भारत 🇮🇳
आ तो गई रंग भरी होली मगर कुछ अराजक तत्व अभी भी पथ्थर फेकने में लगे हुए हैं आ तो गया फागुन का वलेंटाइन मगर कुछ लोग आजादी मागने में लगे हैं भारत जैसे देश […]
पत्थर मत हटाओ मेरे रास्ते से अब तो पत्थरों पर चलने की आदत हो गई है
सिर्फ़ बात की ही बात है किसी की आंखें भी किसी के दिल का राज़ है
हम सबकी खुशियों में शामिल होते हैं मगर मेरी अच्छाई का ये आलम है मेरे जनाज़े में भी शामिल होने से कतराते हैं लोग…..
बजे ढोलक,बजे नगमे मचे हुड़दंग होली में रंगी धरती, रंगा अंबर उड़े है रंग होली में । कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मारे पिचकारी पड़ी है पान की छीटें चढ़े हैं भंग होली में। […]
जो बर्दाश्त न कर पाये वो दोस्त कैसा। जो समझ न आये वो फिर रिश्ता कैसा।।
अपनी कमियो पर रखिये नजर भी जनाब। हर बार गलती दूसरे की नही होती।।
दर्द है उन्हे पर दर्द की वजह का पता नही। दवा चाहिये या दारु या दुआ होगी कबूल…अब यह भी पता नही।।
गुजर रही है जिन्दगी यूं ही गुजर जायेगी। प्रभु तेरी कृपा से भाग्य संभल जायेगी।।
मिलने की वजह भी हम बेवजह ढूँढते है। उन्हें मिलना नही और हम बहाने ढूढते है।।
तलाश करते हैं हम तुम्हारी। बिना पते की चिट्ठियों की तरह।।
यह मेरी कहानी होठों पर हंसी और आंखों में है पानी।।
कितनी गंदी हैं तुम्हारे शहर की गलियां। सब कुछ साफ़ रहता था जब हम रहा करते थे।।
जो तू चाहे वो तेरा हो, रोशन रातें और खूबसूरत सवेरा हो, जारी रहें हमारी दोस्ती का सिलसिला, कामयाब हर मंजिल पर दोस्त मेरा हो|*
“मोहब्बत” इसको कहते है “उनके” “नाम” पर “सब” “लिखना” पर उनका ……. “नाम” “ना “लिखना।
दिल पर ना लो उनकी बातें , जो दिल में रहते हैं…!!!
फ़ैसला हार जीत का तो समय तय करता है। कोशिश मे रह जाये कसर यह तय हमे करना है।।
डर कर आज तक क्या मिला है जमाने को। दाव पर सब लगाना पड़ता है कुछ अच्छा पाने को।
मेरा कुछ भी लिखना…प्रभु जी तुमसे अर्चना का उपहार.. करना होता है… अपने शब्दों से तुम्हे पुकारना… तुम्हे याद करना होता है….
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