महिला दिवस के अवसर पर कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति करती हूँ महिला ही है सारी दुनिया आज मै सबसे कहती हूँ । महिला का सारा जीवन समर्पण में ही बीतता है और प्यार की उम्मीद […]

आंखें चार कर लो इस होली में अपने रंग में रंग लो प्रज्ञा को ना और तरसाओ होली में घर आना तो थोड़ा देर से आना बहुत सुन्दर ना लगना होली में है खास कुछ […]

कितने निर्मोही हो तुम एक बार भी नहीं सोंचते मेरे बारे में ना याद करते हो ना मिलने ही आते हो अब देखना ये हौ है तुम मुझ बिन होली कैसे मनाते हो।

थक के चूर हो चुकी हूँ तुम्हें याद करके अब और याद नहीं करना। अब बसा ले तू गैरों को घर में तेरे दिल में अब मेहमान नहीं बनना।

तुम इस इन्तज़ार में बैठे हो हम याद करेंगे तो बता दें साहिब अब ना वो प्यार रहा ना कशिश रही ना तेरी वो दिवानी ही रही।

आ तो गई रंग भरी होली मगर कुछ अराजक तत्व अभी भी पथ्थर फेकने में लगे हुए हैं आ तो गया फागुन का वलेंटाइन मगर कुछ लोग आजादी मागने में लगे हैं भारत जैसे देश […]

बजे ढोलक,बजे नगमे मचे हुड़दंग होली में रंगी धरती, रंगा अंबर उड़े है रंग होली में । कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मारे पिचकारी पड़ी है पान की छीटें चढ़े हैं भंग होली में। […]

जो तू चाहे वो तेरा हो, रोशन रातें और खूबसूरत सवेरा हो, जारी रहें हमारी दोस्ती का सिलसिला, कामयाब हर मंजिल पर दोस्त मेरा हो|*

मेरा कुछ भी लिखना…प्रभु जी तुमसे अर्चना का उपहार.. करना होता है… अपने शब्दों से तुम्हे पुकारना… तुम्हे याद करना होता है….