तुम्हारे घर आने की बड़ी बेसब्री थी मगर जब वापस आ रही थी तो कोई मेरे कदम पीछे को खींच रहा था वो मेरा दिल था कदम भारी थे रास्ता बहुत कठिन और दिल में […]

तुम्हारा इंतजार किया आम पकने की तरह तुम रोज ख्वाब में आए शाम की चाय की तरह तुम खो गए चाभी के जैसे मगर मैनें ढूंढा है तुम्हें मूंगफली के दाने की तरह

जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]

उसने कुछ यूं देखा मुझको जैसे रूह तक झांक लिया हो… कुछ कहा तो नहीं मगर सब कह भी दिया कुछ ऐसी थी उसकी नज़रें… दूरियाँ जरूर हैं हमारे बीच लेकिन ये सच है मुझे […]

जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]

कोमल मन और आत्मा से आवाज़ दे रही है आहटे कुछ पन्ने किताबों के पलट कर वक़्त आया है मिलने…… सिसकियां खामोश होकर गुनगुना रही हैं कल के किस्से और तन्हाइयां बटोर लाई हैं तमाम […]