इस तरह बसा है तू दिल में तुझे कैसे भूल सकती हूँ तुझे दिल से निकाल नहीं सकती पर दिल को निकाल सकती हूँ
इस तरह बसा है तू दिल में तुझे कैसे भूल सकती हूँ तुझे दिल से निकाल नहीं सकती पर दिल को निकाल सकती हूँ
मुझे ठुकरा कर वो दर- दर भटक रहा है खुदा का खौफ देखो कभी इसके दिल से कभी उसके दिल से निकल रहा है ।
तुम्हारे घर आने की बड़ी बेसब्री थी मगर जब वापस आ रही थी तो कोई मेरे कदम पीछे को खींच रहा था वो मेरा दिल था कदम भारी थे रास्ता बहुत कठिन और दिल में […]
हमारे रिश्ते में मोवन कम था वर्ना, इश्क की गुझिया खूब खुश्क होती।
तुम्हारा इंतजार किया आम पकने की तरह तुम रोज ख्वाब में आए शाम की चाय की तरह तुम खो गए चाभी के जैसे मगर मैनें ढूंढा है तुम्हें मूंगफली के दाने की तरह
कौन कहता है दूरियां प्यार को बढ़ाती हैं दूरियां बस दूरियां होती हैं बस दूरियां ही बढ़ाती हैं
गूंजती रहेगी फिजाओं में आवाज मेरे दिल की हर एक धड़कन धड़कती रहेगी तेरा नाम सुनकर तन्हाई एक कोने में पलती रहेगी।
यहां किसी को कुछ भी नहीं मिलता किसी को मंज़िल तो किसी को रास्ता नहीं मिलता
एक गलतफहमी ने रिश्ता तोड़ दिया जिसे अपना सब कुछ मानते थे आज उसी को छोड़ दिया
कितनी बार पढ़ा था मैंने तेरी आंखों में अपना नाम पर तेरी आंखें भी तेरी तरह फरेबी थी
गिरेबान पर हाथ डालने से पहले एक बार सोच तो लिया होता जिसे हाथ लगा रहे हो वो तुम्हें दिल में बिठा कर पूजा करता है….
एक वक्त था दिन रात सोचा करते थे तुम्हें आज तुम्हें सोचने की फुर्सत ही ना रही ….
तुम हमारे बारे में सोचते भी कैसे जिंदगी ने कभी इतनी फुर्सत ही नहीं दी
तुमने कह तो दिया मेरे दामन में दाग बहुत हैं पर शायद तुमने कभी अपने ज़िस्म पर पड़ी चादर नहीं देगी।
ना रही कोई हसरत ना कोई उम्मीद, तुझे जब से भूल गई जिंदगी बड़े आराम से कट रही है…
बड़ी घुटन होती थी जब हम तुम्हारे हुआ करते थे रिश्ता बोझ बन गया था जब हम तुम्हारे हुआ करते थे
यह घर नहीं दिल है मेरा जिसमें तुम बड़े आराम से रहते हो।
जब से दफ़न अपने दिल में तेरी यादों को कर लिया…. सब पूछते हैं मैं क्यों खामोश रहती हूं?
जबसे तुमको भूल गई सब कुछ अच्छा लगता है….. पहले कोई काम ना था तुझे याद करने के सिवा….
पहले तुम्हारे बिन कुछ भी ना अच्छा लगता था अब तुम्हारे बिन सब कुछ अच्छा लगता है
हर कोई बोलता है क्या खूब लिखती हो मै तेरा ही दिया हर दर्द लिखा करती हूँ उन नासमझों को कौन बताये
रात बीती तारे गिनते और छाई खुमारी बेखयाली में भी हम तुझको बन हवा छू आये
भुला दूंगी अब ना याद करूंगी उस जालिम को ये झूंठा वादा मैं खुद से शुबहोशाम करती हूँ
धोखा देकर प्यार जताती है ए ज़िन्दगी! तेरी आदतें हूबहू मेरे दोस्त जैसी हैं ।
जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]
उसने कुछ यूं देखा मुझको जैसे रूह तक झांक लिया हो… कुछ कहा तो नहीं मगर सब कह भी दिया कुछ ऐसी थी उसकी नज़रें… दूरियाँ जरूर हैं हमारे बीच लेकिन ये सच है मुझे […]
जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]
शाम- सी ढल गई मैं तेरा इन्तज़ार करते करते।
कोशिश बहुत की मैनें नज़र चुराने की वो सामने आये तो हम देखते रह गए ।
मैनें कब मागा था उसको दुआओं में, जरा सा वक्त क्या मांगा माजरा बदल गया ।
अफसाना नहीं ये सदाकत है …. लफ्ज़ खामोश थे फिर भी हमनें बात कर ली …
खफ़ा ही रहना मत मानना है कसम तुमको चाहें कुछ भी हो जाए लौट के ना आना तुम ….
दर्द कितने दिए तूने आज तक ना भरे …. तेरा रंग धुल गया तेरे प्यार की तरह।
बिता कर कुछ क्षण अपनी तन्हाई के साथ जी कर देखा…. पता चला कितना सुकून मिलता है…
कोमल मन और आत्मा से आवाज़ दे रही है आहटे कुछ पन्ने किताबों के पलट कर वक़्त आया है मिलने…… सिसकियां खामोश होकर गुनगुना रही हैं कल के किस्से और तन्हाइयां बटोर लाई हैं तमाम […]
मीलों सफ़र करने के बाद तुझ तक पहुँचे फिर भी मीलों के फासले हैं
तुम्हारा मासूम सा चेहरा दिल तो धड़का सकता है मगर दिल चुरा नहीं सकता
फिर मन करता है तुमसे बात करने का मगर करेगें नहीं तुम्हें छोड़ने का फैसला ना बदलेंगे
उनके देखने का अंदाज़ कातिलाना है जब देखते हैं तो एक बिजली सी दौड़ जाती है
राज़ी हो गए वो और हमने रंग लगा दिया क्या हुआ अगर आज दूसरा दिन था…
तुझे महसूस करने की कोशिश की मगर महसूस कुछ भी ना हुआ ना जाने क्यूँ तेरे जाने के बाद आँख भर आई
करूँ कितना भी श्रिंगार मगर जानती हूँ मैं तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ
करूँ कितना भी श्रिंगार मगर जानती हूँ मैं तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ
बार- बार रोंकती हूँ मैं खुद को मगर उनकी सादगी पर मर ही जाती हूँ
दर्मियां उनको हमने पा करके ना हमने पाया और ना खो पाये
वो आये और हमें मुस्कुरा के देखते रहे हम नाराज़ थे आँख उठा के भी नहीं देखा उनको
मेरे रंग धरे के धरे ही रह गए वो आये और मेरी बेचैनी बढ़ा के चल दिए
तुम जाते हो तो वापस भी आ जाते हो हम जिस दिन चले गए दिल में क्या ख्वाब में भी ना आएंगे
वो जितनी मोहब्बत से हमें देखते हैं काश ! उतना प्यार भी करते तो कैसा होता!
हम इतने भी सस्ते नहीं कि चंद पैसों में बिक जायें मेरे पापा कहते हैं:- मैं लाखों में एक हूँ
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