अपने दिल को दिमाग से हर रोज लड़ाता है, इंसान इंसानों के बीच रहके भी फड़फड़ाता है।। राही अंजाना
अपने दिल को दिमाग से हर रोज लड़ाता है, इंसान इंसानों के बीच रहके भी फड़फड़ाता है।। राही अंजाना
कौन कहता है के हम सब कुछ पल दो पल में कर लेंगे, हम तो मेहमाँ ही दो पल के पल दो पल में क्या कर लेंगे, रहने दो ज्यादा से ज्यादा थोड़ा तो उथल […]
दिल अपना है मगर धकड़न पराई है, इस बात की खबर मैंने ही फैलाई है, नज़र वालों ने ही यहाँ नज़र चुराई है, इस बात में ढूँढो तो कितनी सच्चाई है, किसीने न सुनी मैंने […]
तराजू के दोनों पलड़ों पर रखकर आंकते देखा, वजन प्यार का फिर भी मेरे कम भाँपते देखा, बन न पाया था किसी साँचे से जब आकार मेरा, के लेकर हाथों में फिर मिट्टी को नरम […]
साथ निभाने के लोगों के तरीके अजीब हैं, अपनों से भी ज्यादा लोग गैरों के करीब हैं, मर चुके हैं एहसास यूँ दिल की हिफाज़त में, के धड़कन में नज़रबंद वो कितने अदीब हैं, गुमराह […]
वो दिल ओ दिमाग की पकड़ से बाहिर लगती है, सच यह बात उसके चेहरे से ही ज़ाहिर लगती है।। राही अंजाना
बहुत शोर मच रहा है बाहिर सुनो, शायद भीतर मेरे सब ख़ामोश हैं।। राही अंजाना
जब कभी भी मैं आईने को रूबरू देखता हूँ, सूरत और सीरत को खुद की हूबहू देखता हूँ।। राही अंजाना
वजन ईंटो का उठाकर भी हल्का लगने लगा, कन्धों पे जिम्मेदारी का जो हल्ला लगने लगा।। राही अंजाना
बच्चे की खातर माँ कितने ही दान निकाल देती है, M जिस्म से अपनी सौ बार जैसे जान निकाल देती है, भूख से बिलखता गर दिख भी जाये कोई मासूम तो, कुछ सोचे बिन दुपट्टे […]
न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं, लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं, जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी, उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई […]
ख्वाबों ख्यालों में किसी का कोई पहरा नज़र नहीं आता, जो नज़र में आता तो उसका कोई चहरा नज़र नहीं आता, घूमती गुमराह सी नज़र आती हैं जो खामोश राहें हमको, उन राहों पे ढूंढ़े […]
चेहरे हर एक रोज बदलने का शौख रखते हैं, कुछ लोग अपने आप को बड़ा बेख़ौफ़ रखते हैं।। राही अंजाना
छोटी सी उमर में बदल कर देखो चाल बैठ गया, पहनके इंसा ही जानवर की देखो खाल बैठ गया, बड़ी बहुत हो गई ख्वाइशों की बोतल उस दिन से, रिश्तों का कद भूल जब कोई […]
ज्ञान की पोथियाँ सारी चन्द पैसों में तोल लेता हूँ मैं, जो भी जब भी मुँह में आ जाये यूँही बोल देता हूँ मैं, समझ पाता नहीं हूँ किताबों में लिखे काले अक्षर मैं, सो […]
मन की बातो को कलम के सहारे से इशारा देता हूँ मैं अंजाना होकर भी कुछ लहरों को किनारा देता हूँ, जब जुबां और दिल सब हार कर अकेले में बैठते हैं, तब मैं दर्द […]
कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी, मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी, दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी, पुनर्जन्म के पन्नों […]
तोड़ सके तो कोशिश कर ले एक और बार, अब कसम से दिल को पत्थर कर लिया मैंने।। राही अंजाना
अँधेरे की वाट लगाने को जुगनुओं को आना पड़ा, समन्दर में नहाने को खुद उतर चाँद को आना पड़ा, आवाज़ लगाई दिल ओ ज़ान से मगर सुनी नहीं गई, तो गमों के बिस्तरों को फिर […]
मरम्मत उसूलों की करनी अभी बाकी रह गई, कहीं सच के मुँह पर लगी झूठी चाबी रही गई, बना तो लिए बर्तन सोने चाँदी के भी कारीगर ने, के अमीरी में गरीबी की थाली यूँही […]
छोड़ कर पीछे सबको आज चाँद को घुमाने निकला हूँ, सच कहता हूँ दोस्त मेरे आज खुद को गुमाने निकला हूँ, सोया था न जाने कब से समन्दर की बाँहों में यूँ अकेला, पिघले हुए […]
मैं बहोत खूब जानता हूँ उसे, खुद से जादा ही मानता हूँ उसे वो कहीं भी ढूढ़ता नहीं मुझको, मैं ख्वाबो में भी छानता हूँ उसे।। राही अंजाना
अब तो हमसे कोई और सफर नहीं होता, क्यों भला उनसे अब भी सबर नहीं होता, सब पर होता है बराबर से के जानता हूँ मैं, एक बस उन्हीं पे मेरा कोई असर नहीं होता, […]
अपने आप से ही एक जंग जारी रक्खा करो, खेल कोई भी हो पर अपनी बारी रक्खा करो।। दुश्मन हर कदम पर बैठे हैं नज़रें गढ़ाए यहाँ, होसके तो दुश्मनी में भी कहीं यारी रक्खा […]
दिल ने धड़कन की ही मान लो के अब सुनना छोड़ दी, स्त्री को नचाया जबसे इंसा ने कठपुतली बुनना छोड़ दी, देखती ही रहीं आँखों की दोनों पुतलियाँ एक दूजे को, उँगलियों के इशारों […]
कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह गया, ख़ामोश बादल यूँही बरस कर रह गया, बनाया आशियाना बड़ी उम्मीदों से हमनें, ज़रा सी हुई हरकत तो परस कर रह गया, कैद ऐ मोहब्बत की गिरफ्त […]
कुछ अपने अपनों को ही पराया कहने लगे, दिल को धड़कन का मानो साया कहने लगे।। जो गवांते रहे घर का हर इक कोना रात दिन, गैरों की महफ़िल में ही सब कमाया कहने लगे।। […]
कोई करतब कोई जादू नहीं दिखना होता है, बस मज़हबी दीवारों से बाहिर आना होता है, मुश्किल ये नहीं के बस दायरें बाँधे हैं दरमियाँ, हमें खुद के ही दिल को तो समझाना होता है, […]
उसने मेरे दिलो दीवार के पार देख लिया, मुझसे पूछे बिना ही मुझमे यार देख लिया, बैठा तो था मैं अंधेरे की चौखट पर गुमसुम, पर वही था जिसने मुझमे प्यार देख लिया।। राही अंजाना
जब कभी भी वो मेरा कहीं ज़िक्र करता है, मुझे लगता है वो बेशक मेरी फ़िक्र करता है।। राही अंजाना
रिश्तों के धागों से खुद को सिलना सीख लेते हैं, आसमां से ज़मी के बीच ही खिलना सीख लेते हैं, बनाते ही नहीं ख्वाब वो उन मखमली बिस्तरों के, गरीबी की गोद में ही जो […]
तेरे प्यार की अंताक्षरी में राही हार कर, बैठा है जंग शब्दों से अक्षरी जीत कर।। राही अंजाना
तेरी गोद में आकर मुझको जन्नत मिल जाती है, मांगी हुई मेरी पूरी मुझको मन्नत मिल जाती है।। राही अंजाना
बीते लम्हों से खुलके गुजारिश करनी होगी, आज फिर डाकिये से सिफारिश करनी होगी, दबा रखीं थीं एहसासों की चिट्ठियां छिपाकर, खुलेआम लगता है सबकी रवाईश करनी होगी।। राही अंजाना रवाईश- आतिशबाजी
हर शब्द हर वक्त तुझे झूठा ही लगेगा यहाँ, जो तूने प्रेम का ढाई अक्षर गर पढ़ा ही नहीं, जो कहता हूँ सच है ऐ मेरे दिल सुन तो ज़रा, ख्वाब दिलों के बाहिर तूने […]
होली के रंग में हम भिगायेंगे अंग, मिल जाये हमें कोई तो लगाएंगे रंग, न सोचेंगे न समझेंगे न समझायेंगे हम, मिलजाये जो थोड़ी सी तो चढ़ाएंगे भंग, घूमेंगे फिरँगे झूमेंगे हम मस्ती में अपनी, […]
मजबूरियों से भरे कटोरे के चुल्लू भर पानी को देख, समन्दर भी हार कर एक दिन आंसुओं में डूब गया। राही अंजाना
उसकी आँखों में मेरी आँखें उतर कर भूल गईं, दिल ओ जिगर के पैमाने पे असर कर भूल गईं, गहरा समन्दर था ये गुमान टूट कर बिखर गया, उस रोज़ उसकी अलकों से सफर कर […]
जो सवाल अभी तलक बना ही नहीं, शायद मैं जवाब उसी सवाल का हूँ।। राही अंजाना
क़र्ज़ शायद पिछले जनम का चुकाना पड़ता है, इसीलिए नन्हें कन्धों को वजन उठाना पड़ता है। राही अंजाना
वीर थे अधीर थे सरहद के जलते नीर थे, इस देश के लिए बने तर्कश के मानो तीर थे, भगतसिंह राज गुरु सहदेव ऐसे धीर थे, बारूद से भरे हुए ये जिद्दी मानव शरीर थे। […]
महिला दिवस शिव की शक्ति बनकर तूने हर क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे […]
कागज़ की सीढ़ी बनाकर चढ़ते नज़र आते हैं, जो पढ़ते हैं अक्सर वही बढ़ते नज़र आते हैं, किसी कलम की स्याही सा जिंदगी में चलने वाले, ख्वाबों को हकीकत का सच गढ़ते नज़र आते हैं।। […]
जहाँ कचरे के ढ़ेर में भी बच्चे खुशियाँ ढूंढ़ लेते हैं, वहीं कमज़र्फ दिल इसमें भी सुर्खियाँ ढूंढ़ लेते हैं।। राही अंजाना
तेरे ख्वाबों की दो ख़ुराक लेकर मैं, बरसों से मोहब्बत के बुखार में हूँ।।
क्या सच में तुम भूख के मायने जानते हो, या यूँही झूठ मूट के तुम आईने छानते हो।। राही अंजाना
हाथों की लकीरें तितलियाँ बन उड़ीं, जब जी चाहा उनका जिधर तन उड़ीं, बंद मुट्ठी में बड़ा दम घुटता था कहकर, रंग हाथों में छोड़ वो सुनहरा ठन उड़ीं।। राही अंजाना
ताबिश ए जलन ने जला कर रख दिया, भीतर ही भीतर मुझे गला कर रख दिया, फूंकता रहा हवा जिस चिंगारी में हर दिन, उसी धुँए ने फिर मुझे घुला कर रख दिया, मोहब्बत किसको […]
न अक्षर चुराने दिया न अक्स चुराने दिया, मैंने दिल में बैठा जो न सख्श चुराने दिया, बदलते रहे लोग चेहरे के मुखौटे आये दिन, मैंने अपनी मोहब्बत का न नक्श चुराने दिया, जुम्बिश अश्क […]
ये कहानी यूँहीं अल्फ़ाज़ों में बयाँ होगी नहीं, बस दो चार किताबी पन्नों में जमा होगी नहीं, एहसास ज़मी पर आसमानी करने वाले सुनो, मोहब्बत ज़ंजीरों में जकड़ कर जवाँ होगी नहीं, रास्ते राहों में […]
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