हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं, देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं, पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर, हर सिगरट के साथ वो रोज […]

जिनको ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया, जिनको देकर सहारा आगे बढ़ना सिखाया, वो सब आज हाथ छुड़ाने लगे, देखो बूढ़ा कह कर वो सताने लगे, जिनको अपना बनाया वो सपना था मेरा, कह कर आज […]

तू समन्दर मैं तेरा किनारा बनूं, तू जो बिखर जाए तेरा सहारा बनूँ, मुझसे टकराये तू, मुझमे मिल जाए तू, तुझमे बस जाऊं मैं, मुझमे बस जाए तू, तू समन्दर मैं तेरा…. ओ समन्दर तू […]

किनारे पर भी रहूँ तो लहर डुबाने को आ जाती है, बीच समन्दर में जाने का हौंसला हर बार तोड़ जाती है, दिखाने को बढ़ता हूँ जब भी तैरने का हुनर, समन्दर की फिर एक […]

ना तन्हाई की समझ है ना काफिले में चलने का सलीका मुझे, मगर ठहरकर कभी मन्ज़िल मिलती नहीं, सो अक्सर राहों पर बढ़ता रहता हूँ मैं, ना चुप्पी की समझ है ना शोरो गुल में […]

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये। गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, […]

गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, गांधी जी के मजबूत […]

आजाद हैं हम या अफवाह है फैली चारों ओर आजादी की, जंज़ीरों में बंधी है आजादी या बेगुनाही में सज़ा मिली है आजादी की, हकीकत है भी हमारे देश की आजादी की, या बस गुमराह […]

जितने भी ख़्वाब मेरे झूठ के बहाने निकले, उतने ही सच हकीकत के सिरहाने निकले। जितने दुश्मन मेरे घर के, किनारे थे मौजूद, उतने ही लोग ज़माने में, मेरे दीवाने निकले। ढूढ़ते रहे जिन्हें समन्दर […]

मांगे जब भी तब उस बेटी की हर हरमाइश् पूरी हो, ऐ खुदा काबिल बना दे, हर बाप को इतना के उसकी कभी जेब ना ढीली हो, उठा दे उन्गली बेटी जिस तरफ ज़माने में, […]

रात के अँधेरे में जो ख़्वाबों को हकीकत बनाते हैं, वो सुबह के उजालों में अकेले ही खड़े नज़र आते हैं, और जो जागती हुई आँखों में अपने ख्वाब सजाते हैं, वो दुनियाँ की भीड़ […]

अ से अ: और क से ज्ञ जब लिखने लगा था मैं, माँ को मेरी पढ़ने वाला बच्चा दिखने लगा था मैं, फिर शब्दों को मिलाकर जब पढ़ने लगा था मैं, माँ को मेरी अफसर […]

राही अंजाना है कहीं अंजाना ही रह ना जाए, ज़िन्दगी के इस जटिल सफर में कहीं बेमाना ही रह ना जाए, उठाते हैं कुछ अपने ही उंगलियां अपनी, कहकर के राही क्या किया तुमने, कहीं […]

रोकर खुद वो दूसरों को हंसाता है, देखो वो जोकर कैसे अपना किरदार निभाता है, सहज नहीं होता होगा यूँ, अपने दर्द छुपाना, कितना मुश्किल होता होगा ये किरदार निभाना, हरगिज़ नहीं है ऐसा के […]

बहाई थीं बचपन में जो कश्तियाँ सारी, आज समन्दर में जाकर वो जहाज हो गई है, चलाई थीं सड़कों पर जो फिरकियाँ सारी, आज समय के बदलाव में गुमराह हो गई हैं, बनायी थीं रेत […]

जला दो इतने दीपक ज़माने में, के किसी कोने में अब रात की कोई स्याही ना दिखे, दिखा दो सच के आईने ज़माने को ऐसे, के किसी को झूठे चेहरों की कोई परछाई ना दिखे, […]

माँ की गोद छोड़, माँ के लिए ही वो लड़ते हैं, वो हर पल हर लम्हां चिरागों से कहीं जलते हैं, भेज कर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये, धड़कनें वो अपनी माँ की सुनते हैं, […]

सच के समन्दर में झूठ की कश्तियाँ डूबती नज़र आती हैं, जहाँ तलक नज़र जाती है बस सच की कश्तियाँ नज़र आती हैं, बढ़ते झूठ के सुनामी हैं कई सच की बस्तियाँ गिराने को, मगर […]

बीत गया सुकूँ का बादल अब शिकन का मौसम आया है, जो लगता था आशियाना अपना सा कभी, आज उड़ कर आये गैर परिंदों का घर लगता है, बनाये थे शिद्दत से अपने जो घोंसले […]

आज दिल में छुपे हर राज़ लिखने बैठा हूँ, तुझको अपने ख़्वाबों किस्सों का सरताज लिखने बैठा हूँ, एतराज़ हो कोई तो मुझसे खुल कर कह देना, आज खामोशी को भी तेरी आवाज लिखने बैठा […]

लाखों की भीड़ में भी तेरे कदमों की आवाज़ पहचान लेता हूँ, मैं तेरी खामोश आँखों में छुपा हर दर्द पहचान लेता हूँ, यूँ तो भटक भी जाऊ किसी मोड़ मगर, मैं बन्द आखो में […]

चढ़ना सीख लो “राही” ऊँची चोटी पर, मगर उतरने का हुनर भी याद रखना, बनते हैं तो बन जाए दुश्मन दोस्त पुराने, मगर दोस्ती की तुम हर मोड़ पर मिसाल बनाये रखना, करेंगे तोड़ने की […]

तन्हाई के आलम में जब भीड़ से हट कर देखा, सोंच का समन्दर कितना गहरा है ये अनुभव कर देखा, चलते ही जाओ राहों पर ये जरूरी नहीं, दो पल रुका और ठहरकर एहसास कर […]

अक्सर अँधेरे में फंस कर ही रौशनी का एह्साह होता है, एक छोटा सा दीपक ही अँधेरे को मिटाने को पर्याप्त होता है, यूँ तो नज़र नहीं आती अँधेरे में खामियां किसी की, मगर ज़रा […]

कलम से लिख दूँ नाम जो सरेआम हो जाए, ऐसा कोई नहीं है जो फिर अब्दुल कलाम हो जाए, गीता और कुरान को जो रखते थे मन में, ऐसा कोई नहीं जो अब मिसाइल मैन […]

जब स्वतंत्र भारत राज तो और स्वतंत्र हैं विचार तो, फिर घिरे हुए है क्यों सुनो तुम आतंक में भारतवासियों, वीर तुम बढ़े चलो अब आतंकी सारे मार दो, सरहद पर तुम डटे रहो, गद्दार […]

बा मुश्किल छोड़ जाती थी वो माँ मुझे जिस मकान में, आज सूना है घर का हर एक कोना उस मकान में, सुनाती थी दिन रात माँ जहाँ साफ़ सफाई के पीछे, आज लगे हैं […]

धुएं से भरे चूल्हे में माँ का वो रोटी बनाना, यूँही नहीं है माता का मेरी ममता लुटाना, आँखों से बहाती है आंसू फिर हांथो से अपने खिलाती है, आसान नहीं है मेरी माता का […]

अब किताबें सीने पर लेटकर सोती नहीं हैं, उंगलियां मोबाइल से एक पल को जुदा अब होती नही हैं, लगाते थे लोग महफिलें कभी खामोशियां मिटाने को, आज महफ़िलें भी सूनी सूनी होने लगी हैं॥ […]

Shakun Saxena उछाल उछाल कर पापा मुझे दिल्ली दिखाते थे, हंस हंस कर पापा को मैं खूब रिझाती थी, भरोसे का अटूट रिश्ता था हमारा, छूट कर हाथो से मैं फिर हाथो में आ जाती […]

अपनी सोंच के समन्दर से ज़रा, बाहर निकल कर तो देख, उसको पाना है तो ज़रा प्रह्लाद बन कर तू देख। अपनी किस्मत के भरोसे न बैठ, कदम बढ़ा कर तो देख। मन्ज़िल है पानी […]

ख्वाइशें भी हैं और कुब्बत भी है छू लेने की बुलंदियां , मगर, रौंदने का दूसरों को हुनर मैं कहाँ से लाऊँ, जो हर कदम देखकर भी सोये हैं मेरी मेहनत, उन फरिश्तों को जगाने […]

कदम कदम बढ़ा रहे हैं, अपनी छाती अड़ा रहे हैं, कश्मीर की धरती पर वो सैनिक अपनी, माँ का गौरव बढ़ा रहे हैं, तोड़ रहे है दुश्मन पल पल, सरहद की दीवारे हैं, वीर हमारे […]

चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं, जहाँ सरहद की हर दिवार मिटाते हैं, छोड़ कर मन्दिर मस्ज़िद के झगड़े, हरा और भगवा रंग मिलाते हैं, चलो मिलकर एक….. जिस तरह मिल जाते हैं परिंदे […]

धरती माँ फिर त्रस्त हुई हैं आतंकी गद्दारों से, खेल लाल रंग की होली अब, धरती माँ को मुक्त करो, बढ़ो वीर तुम खूब लड़ो अब, इन दुश्मन मक्कारों से, धरती माँ फिर त्रस्त हुई […]

डूबते है लोग तो तिनके का सहारा मांगते हैं, कितनी अजीब है ये दुनिया जहाँ लोग, टूटते हुए तारों से भी दुआ मांगते हैं, जहां चुप रहना हो वहां खूब बोलना, जहाँ बोलना हो वहॉ […]