जोड़ कर हाथों को यहाँ योग बनाया जाता है, मन को कर एकाग्र यहाँ मनोयोग बनाया जाता है, सम्बन्धो में बंधने को यहाँ योग मिलाया जाता है, जीवन मृत्यु का गहरा यहाँ संयोग बनाया जाता […]
जोड़ कर हाथों को यहाँ योग बनाया जाता है, मन को कर एकाग्र यहाँ मनोयोग बनाया जाता है, सम्बन्धो में बंधने को यहाँ योग मिलाया जाता है, जीवन मृत्यु का गहरा यहाँ संयोग बनाया जाता […]
देखते ही देखते सारे जवाब खो गये, ज़मीन पे लेटते ही सारे ख्वाब सो गये, उठाये थे ज़माने ने सावल जितने भी, हकीकत से मिले सारे हिजाब हो गये।। राही अंजाना
आईना आईने के पार देखने की कोशिश में टूट गया, ख्वाब ख्वाबों के पार देखने की कोशिश में छूट गया, छिपाया मगर छिपा न सका सनम से मोहब्बत अपनी, के चेहरा चेहरे के पार देखने […]
रिश्ता जोड़कर कोई तोड़ने की आदत नहीं मुझको, दिल के सीधे रस्ते को मोड़ने की आदत नहीं मुझको, काँच के आईने में चेहरा देखकर खुश हो लेता हूँ मैं, उसकी नज़रों में नज़ारे छोड़ने की […]
लगाकर गले से तुझको दूरियाँ मिटानी थीं, कितनी गहरी हैं ये नज़दीकियाँ दिखानी थीं, तूने नज़रें मिलाई नहीं जिस अंजाने राही से, उसे तुझे हवाओं की सरगोशियाँ सुनानी थी।। राही अंजाना
छिपाकर किताबों में कोई मेरी तस्वीर भूल गया, दबाकर पन्नों में जैसे कोई मेरी तकदीर भूल गया, बैठा रहा मैं यूँही किसी पैदल सा गुलाम बनकर, के बिसात पर चलने की मेरी तदबीर भूल गया।। […]
उस आसमानी को मैं ज़मीनी बुला बैठा, उसकी शिद्दत में मैं खुद को भुला बैठा, आराईश में जिसकी मैं साँझ सवेरे बैठा, उसकी मोहब्बत में मैं खुद को घुला बैठा, मेरे जिस्म से मेरी रूह […]
मुखौटे के पीछे चेहरा छुपाया करते हैं, झूठ बोलने वाले सच गुमाया करते हैं, गुमराह करने की चाहत में आईने को, ऑंखें आँखों से अक्सर चुराया करते हैं, दिन के उजाले में सच हुआ नहीं […]
भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी, इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम, सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी, इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ […]
पतंगे को दीपक की आहोशी में जाकर अच्छा लगा, ज़िन्दगी को मौत की मदहोशी में आकर अच्छा लगा, बन्द रही थी सर्द रातों में कहीं वीराने में जो मोहब्बत, आज खुलेआम उसे गर्मजोशी में आकर […]
बस यूँही हम मिले और मिलते रहे, थे कली फिर भी फूलों से खिलते रहे, रिश्ते जितने ही हमसे उलझते रहे, उतना ही प्रेम में हम सुलझते रहे, रोका हमको बहुत हम रुके ही नहीं, […]
अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, खुद ही के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर […]
एक माँ की गोद में एक माँ के लाल आ गए, दोनों ही माँ की आँखों में आसूँ हाल आ गए, रंग माथे दुरंगा लगा कर ख़ुशी से भेजा जिन्हें, वो लिपटकर तिरंगे में आज […]
सच की दीवारों पर झूठ की तस्वीरें दिखाई गईं, जब भी सर उठाया तो बस शमशीरें दिखाई गई, बैठा ही रहा मैं भी शहंशाहों सा चौकड़ी लगाकर, एक के बाद एक मुझे सबकी तकदीरें दिखाई […]
तुम अपना न सही तो पराया ही कह दो, के मुझे झूठे मुँह अपना साया ही कह दो, इससे पहले के बन्द हो न जाएँ ये आँखे, था मुझे तुमने दिल में बसाया ही कह […]
सांसों की आवाज़ एक दूजे को सुनाई जाती है, होटों पर अक्सर ही ख़ामोशी दिखाई जाती है, एक चेहरे पर एक चेहरा कुछ इस कदर चढ़ता है, के जिस्म पर जैसे किसी कोई रूह चढ़ाई […]
अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, खुद ही के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर […]
के शायद मुझको ही मेरी बात कहनी नहीं आती, के इस दिल से कोई आवाज़ ज़हनी नहीं आती, गुजरता है ये दिन मेरा यूँहीं ख्वाबों ख्यालों में, मगर सच है के मुझसे रात ही सहनी […]
दिन और रात के बीच हुई मुलाकात समझनी होगी, कितनी गहरी है ये बात ज़रा एक बार समझनी होगी, शांत रहे तो जिसने भी चाहा चोट जमाकर के मारी, पर एक दिन तो औजारों की […]
परत दर परत यूँही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी, उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी, हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है कभी, के जिस्म को काट भूख […]
मकर संक्रांति में जैसे ही ढल निकले, सूरज चाचू उत्तरायण में चल निकले, सोचा नहीं एक पल भी फिर देखो, टिकाई नज़र आसमाँ पर हम नकले, चढ़ा ली खुशबू रेवड़ी मूंगफली की ऐसे, के सुबह […]
छोड़ कर एक जिस्म को एक जिस्म में जाना होता है, बस यही एक इस रूह का हर एक बार बहाना होता है, रूकती नहीं बड़ी मशरूफ रहती है ज़िन्दगी सफ़र में, कहते हैं के […]
अपने काँधों पर अपनी ज़िन्दगी को उठाना पड़ा, वक्त के पहिये से कदमों को अपने मिलाना पड़ा, उलझने बहुत मिलीं दिल से दिमाग के रास्ते यूँ के, खुद से ही खुद ही को कई बार […]
असमंजस इसमें बिल्कुल नहीं के बच्चा हूँ मैं, बात ये है के ज़हन से अभी भी कच्चा हूँ मैं, आ जाऊँ बाहर या माँ की कोख में रह जाऊँ, सोच लूँ ज़रा एक बार के […]
ज़मी पर जब भी गिरूँ आसमां से उठाने आता है, सोये हुए ख्वाबों को वो मेरे रोज़ जगाने आता है, दिखता किसी को नहीं ढूंढते सब हैं ठिकाने उसके, एक वो है जो राही को […]
खामोश दिखने वाले अक्सर बहुत बोला करते हैं, अपने ही अंतर्मन को वो हर दम टटोला करते हैं, जिज्ञासा छिपती है पर चेहरे पर दिख जाती है, कभी कभी जब मुख से वो चुप्पी तोला […]
गरीबी की हर शय को मात देने को बैठा हूँ, मैं उम्र के इस पड़ाव को लात देने को बैठा हूँ, मजबूत हैं मेरे काँधे कुछ इस कदर मेरे दोस्तों, के मैं अपने सपनों को […]
रिश्तों की उधेड़ बुन में खुद को ही सिलना भूल गया, सबसे मिलने की चाहत में खुद से मिलना भूल गया, बचा नहीं कोई फूल खिले सब मेरी ही फुलवारी के, एक मैं जाने कैसे […]
दिल जोड़ने वालों ने ही दिलों के तार काट दिए, खिलौनों से खेलने वाले बच्चों के यार काट दिए, ब मुश्किल ही बचे थे चन्द किस्से इस बचपन के, सुना है उसके भी किसीने पन्ने […]
माँ की ममता का हिसाब कराना मुश्किल है, दो और दो से ज्यूँ आठ बनाना मुश्किल है, बिछी हुई है यूँ बिसात यहाँ मानो सम्बंधों की, जिसमें अपनों पर ही चाल लगाना मुश्किल है, इंसानों […]
मुझसे मेरा ही एक अभिन्न अंग छीन लिया गया, मानो दिल से धड़कन का ही संग छीन लिया गया, हाथ मलता ही रहा देखकर कुछ कर न सका मैं, बेगुनाह मेरी आँखों से उनका हर […]
यहां हर कोई एक दूजे की कश्ती डुबाने को बैठा है, जान बूझकर ही मासूम सी हस्ती मिटाने को बैठा है, लत लगी है बस निकल जाऊँ किसी तरह सबसे आगे, सोंच लेकर यही पीठ […]
मोहब्बत होती तो मिलने की चाहत भी अजब होती, आँखों से ही आँखों को पिलाने की भी तलब होती, मिलता नहीं किसी शहर में जब ठिकाना कोई कहीं, ज़मी छोड़ के आसमाँ पर बिठाने की […]
नव वर्ष आने को है, कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है, सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है, छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ, उन उम्मीदों से पर्दा हटाने […]
जवाब देने में हाज़िरजवाब बताये गए हम, के अपने ही घर में खामोश कराये गए हम, ज़िन्दगी बनाने को कितनी ही जगाये गए हम, के अपनी ही चन्द सांसों से दूर कराये गये हम, हर […]
छोड़ खिड़की दरवाजे अब मुँह पर ताले लगते हैं, जहाँ तहाँ भी देखो अब तुम चुप्पी के गाले लगते हैं, कदम कदम साथ निभाने के अक्सर वादे करते थे, आज सभी के ही मानो जैसे […]
मैं जितना सुलझता गया वो उतनी उलझती गई, मेरे दिल में उतरती गई आँखों से छलकती गई, डोर इतनी मजबूत बंधी उसकी जुल्फों से जानो, के “राही” की राहें जैसे खुद ब खुद सँवरती गई।। […]
पैदा होने से पहले मिटा दी जाएँगी बेटियाँ, बिन कुछ पूछे ही सुला दी जाएँगी बेटियाँ, गर समय रहते नहीं बचाई जाएँगी बेटियाँ, तो भूख लगने पर रोटी कैसे बनाएंगी बेटियाँ, जहाँ कहते हैं कन्धे […]
तेरी तस्वीर बनाने में जब भी जुट जाया करता हूँ, खुद ब खुद ही जाना तुझसे जुड़ जाया करता हूँ, रंगों की समझ रखता नहीं हूँ शायद यही सोचकर, एहसासों का ही अंग तुझपे जड़ […]
जिस्म ऐ माटी में इस रूह को डालता कौन है, बनाकर इन पुतलों को ज़मी पर पालता कौन है, मिलाकर हवा पानी आसमाँ आग पृथ्वी को, वक्त वक्त पर ख़ुशी और गम में ढालता कौन […]
सोंच समझकर वोट दें तो बन जायेगी तकदीर, चलो निकाले सोच समझ कर ऐसी कोई तदबीर, विश्व पटल पर छप जाये अपने देश की तस्वीर, जागरूक करे जो हर जन को हो ऐसी कोई तरकीब, […]
निगाहें तुझ ही पर टिकाये रहता हूँ, मैं यूँही खुदको तुझमें गुमाये रहता हूँ, तुझको समझने की जिद ठानी हैं ऐसी, के हर दम मैं गर्दन अपनी झुकाये रहता हूँ।। राही अंजाना
अपने दिमाग के कुछ खयालों को उड़ जाने दिया, मैंने अपने दिल को इस दिमाग से लड़ जाने दिया, कश्मकश बहुत देर चली फिर हार कर बैठ गया, मैंने अपने एहसासों को फिर यूँही मुड़ […]
सब कुछ सहना है मगर तुम्हें अपना नाम नहीं लेना है, आदमी तभी हो तुम जब तुम्हें कोई ईनाम नहीं लेना है, रखना है रोककर तुम्हें अपने आँखों के आसुओं को बेशक, अपनी मेहनत का […]
किसी सांचे में भी ढल नहीं पाया हूँ मैं, शायद ठीक से ही बन नहीं पाया हूँ मैं, वक्त बेशक ही लगा है मुझको बनाने में, पर सच है खुद को बदल नहीं पाया हूँ […]
देखा किसी ने नहीं है मगर बहुत बड़ा बताते हैं लोग, कुछ लोग उसे ईश्वर तो कुछ उसे खुदा बताते हैं लोग, पता किसी के पास नहीं है मगर रस्ता सभी बताते हैं लोग, कुछ […]
अब एन्टिना कोई घुमाता नहीं, छत पर यूँहीं कोई जाता नहीं, बैठे रहता हर एक यहां फैल कर, अब रिमोट से ऊँगली हटाता नहीं।। राही (अंजाना)
पूरे शहर को इस काले धुंए की आग़ोश में जाना पड़ा, क्यों इस ज़मी की छाती पर फैक्ट्रियों को लगाना पड़ा, चन्द सपनों को अपने सजाने की इस चाहत में भला, क्यों उस आसमाँ की […]
बहुत कुछ कहते कहते रुक जाया करते हैं, बात ये है के हम इज्जत कर जाया करते हैं, रखते हैं अल्फ़ाज़ों का समन्दर अंदर अपने, और ख़ामोशी से दिल में उतर जाया करते हैं, प्रश्न […]
मेरी आँखों में ही खुद को निहारा करता है, हर रोज़ ही वो चेहरा अपना संवारा करता है, आईने के सही मायने उसे समझ ही नहीं आते, कहता कुछ नहीं बस ज़हन में उतारा करता […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.