मैं किसान हूं
समझता हूं मैं अन्न की कीमत
क्योंकि वो मैं ही हूं
जो सींचता हूं फसल को
अपने खून और पसीने से
मरता हूं हर रोज
अपने खेत की फ़सल को जिंदा रखने के लिये
ताकि रहे न कोई भूखा
कोई इस दुनिया में
फिर भी तरसता हूं खुद ही
रोटी के इक निवाले को
ले जाता है कोई सेठ
मेरी पूरी फ़सल को
ब्याज के बहाने, कोढ़ियों के दाम
लड़ता हूं अकेला
आकर शहर की सड़्कों पर
फिर भी नहीं हो
तुम साथ मेरे
अपने अन्नदाता के!
Author: Vasundra singh
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अन्नदाता
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जिंदगी
जिंदगी थी बस
चंद लम्हों की दास्ता
रह गयी अधूरी फिर भी
अनकही, अनसुनी -
अधूरे अरमानों की झांकी
अधूरे अरमानों की झांकी आज गुजरी मेरे दरम्यां से
इक जिंदगी जो जी नहीं, वो देखी आज मैनें -
चंद पैसों की खातिर!
ले देकर कुछ यादें हैं मेरे पास
जो दिल की तिजोरी में
संभाल के रखीं हैं
गरीबी जब आयी करीब मेरे
तो लोगों ने हिदायत दी
कि कर लूं सौदा
कुछ यादों का
चंद पैसों की खातिर! -
हर्फ़ ब हर्फ
आजकल हर्फ़ ब हर्फ तोल परख कर लिखतीं हूं
न जाने कौन सा मायना निकाल ले दुनिया!! -
वो आये दबे पांव से यूं
वो आये दबे पांव से यूं
कानों ने तो कुछ सुना नहीं
मगर दिल ने सब सुन लिया -
मां रोती है
नन्हे से बच्चे को जब
सड़क पर चाय बेचते देखती हूं
इक बहन सिसकती है
मां रोती है
मेरे अंदर -
बेघर
तेरे दिल में अगर जगह मिल पाती
हम बेघर न समझती ये दुनिया -
आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है
आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है
आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बनेसमाज जब संवेदनहीन हो जाये
तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बनेतिरंगे के कपड़े को तो सबने देखा है मगर
उसकी रूह में झांक सकें तो कोई बात बनेंहर कोई अपनी बात ही करता है यहां
कभी कोई दूसरे की बात हो तो बात बनेंमेरी बातों से लहू मत करना तुम दिल अपना
किसी के क्रन्दन से जब दिल दुखे तो कोई बात बनें -
लफ़्ज
लफ़्ज अक्सर लवों पर ही ठहर जाते है
जमाने के खौफ़ है कि क्या कहेगा सुनकर -
तन्हाई
इस मायूस दिल को कौन समझाये
मोहब्बत में बस तन्हाई ही मयस्सर है -
तक़रीब ए इश्क
कोई तरकीब हो अगर तो जरूर बतायें
तक़रीब ए इश्क कैसे हो हम -
पतंग
पतंग को देख कर आज उड़ने को मन हुआ
फिर पैरों में पड़ी जंजीर देखकर मन थम गया -
दो सिक्के
ले दे के दो सिक्के ले कर चली थी बाजार में
इक उछालने में खो गया, एक को रख भूली कहीं पर -
दिल और दिमाग
दिमाग बढाने की दवा तो हर जगह मिलती है
दिल को बढा करने का हुनर बस हमें आता है
दिमाग है इसलिये सोचते हो बस खुद की
दिल से जख्म को सहलाना बस हमें आता है -
जहां ए इश्क
न बंदिशें रोक पायी तुझे
न मिन्नतों का असर हुआ तुझ पर
ए दिल बता आखिर
जहां ए इश्क में ऐसा किया दिखा -
कहानी लापता है
कहानी लापता है, किरदार की खबर नहीं
फिर भी वहम है कि मेरा जाता ही नहीं -
अब बस खामोशी है जो अजीज है
चंद सिक्के क्या खत्म हुये
रुखसत हो गये जो मेरे करीब थे
तनहाई है जो साथ रहती है
अब बस खामोशी है जो अजीज है