सफ़र मे अपना गाँव भूल गये है, मोहब्बत वाली छाव भूल गये है महक मिट्टी कि बारिश वाली वो खुशियाँ शिफारिश वाली हम उनसे दुर इतने क्यो है अब इनसे मजबुर इतने क्यु है अब […]

ये गज़ल मैने आस्तिन के सापो के लिये लिखी है जो कश्मीर मे है,अगर सही लिखा हो तो आप सबकी प्रतिक्रिया चाहता हु, ********************************** अपनो को अनजान बना बेैठे हो, जन्नत को शमशान बना बेठे […]