काश्मीर रुला दिया तुमने.

ये गज़ल मैने आस्तिन के सापो के लिये लिखी है जो कश्मीर मे है,अगर सही लिखा हो तो आप सबकी प्रतिक्रिया चाहता हु,
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अपनो को अनजान बना बेैठे हो,
जन्नत को शमशान बना बेठे हो
कलम वाले हाथो मे तलवार है,
तुम खुद को शैतान बना बेैठे हो
हमारा राम तुम्हारा खुदा हेेै,ही
खुद को क्यु भगवान बना बेैठे हो,
कई आँगन मे अब सुनापन है,
जीवन सबकी विरान बना बैठे हो,
विशाल सिंह (बागी)
9935676685

Comments

5 responses to “काश्मीर रुला दिया तुमने.”

    1. i am a student of BCA. Avatar

      धन्यवाद आपका

    2. i am a student of BCA. Avatar

      धन्यवाद आपका

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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