हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

4 Comments

  1. तुम्हारी राह में देखती रहती है आसमां एकटक
    ये आखें अब बस तेरी तस्वीर अटक गयी है

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