मुक्तक

भ्रम

हम भ्रम पाल लेते हैं, “मैंने ही उसे बनाया है”, कभी सोचा तूने, भू-मण्डल किसने बसाया है। भाई ये सब कर्मानुसार ही, ब्रह्मा की माया है, कोई सूरमा आज तक, अमर नहीं हो पाया है।। »

फुलझडियां

मनचले ने रुपसी पर, तंज कुछ ऐसा गढ़ा, काश जुल्फ़ों की छांव में, पड़ा रहूं मैं सदा। रुपसी ने विग उतार, उसे ही पकड़ा दिया, ले रखले जुल्फ़ों को तू, पड़ा रह सदा सदा।। फेसबुक की दोस्त को, बिन देखे ही दिल दे दिया, जो भी मांगा प्रेयसी ने, आॅनलाईन ही भेज दिया। एकदिन पत्नी के पास वही गिफ्ट देख चौंक गया, उसकी पत्नी ही फ्रेंड थी, बेचारा मूर्छित हो गया।। पत्नी से प्रताड़ित पति ने ईश्वर को ताना दिया, क्या पाप क... »

क़िताबें

जब भी मन घिर जाता है अपने अंतर्द्वंदों की दीवारों से, जब मस्तिष्क के आकाश में छा जाते हैं बादल अवसादों के…!! तब छांट कर संशय के अँधियारों को, ये जीवन को नई भोर देती हैं, ‘किताबें’…..मन के बन्द झरोखें खोल देती हैं..!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ »

प्रेम और विज्ञान

एक महान विज्ञानी का कथन है… ‘हर क्रिया की बराबर किंतु विपरीत प्रतिक्रिया होती है’..!! प्रेम करने वाले इस तथ्य के जीवंत उदाहरण हैं…. समाज ने जितनी तत्परता से रचे हैं प्रेमियों को एक दूजे से दूर करने के षड्यंत्र… प्रेम उतने ही वेग से गहरी पैठ बनाता गया है प्रेमियों के हृदयों में…!! वास्तव में विज्ञान के समस्त सिद्धांतों की व्याख्या हेतु प्रेम सर्वोत्तम माध्यम है&#... »

चुम्बन

वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की, रिश्तों की, विश्वास की…!! और मैंने अंकित कर दिया हर एहसास उसके दिल में सिर्फ चूम के उसके माथे को…!! ‘दरअसल चुम्बन, आलिंगन और प्रेमल स्पर्श मानव को सृष्टि द्वारा प्रदत्त सर्वश्रेष्ठ भाषाएँ है..!!’ ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ (13/02/2021) »

आलिंगन

सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर अपनी मौलिकता से समझौता करते मानव सुनो..!! अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना इतना सा प्रेम…!! कि जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा आलिंगन करे तो उस प्रेम की ऊष्मा से पिघलकर आँसू बन बह उठे उसके मन में जमी पीड़ाओं की बर्फ…!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ (12/02/2021) »

वचन

यदि बाँधने जा रहे हो किसी को वचनों की डोर से, तो इतना स्मरण रखना कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा उसे उम्र भर की अनन्त प्रतीक्षा में… क्योकि, प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर देती है स्वप्नों और उम्मीदों के साथ-साथ मनुष्य की आत्मा को भी…!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ »

रिक्तता

निकाल कर फेंक दिया है मैने अपने भीतर से हर अनुराग, हर संताप… अब न ही कोई अपेक्षा है बाक़ी औऱ न ही कोई पश्चाताप..!! मैं मुक्त कर चुकी हूँ स्वप्न पखेरुओं को आँखो की कैद से… वो उड़ चुके हैं अपने साथ लेकर मेरे हृदय के सारे विषादों को.. अब मेरे अंतस में है एक अर्थपूर्ण मौन और रिक्तता.. रिक्तता जो स्वयं में है परिपूर्ण जो पूरित है सुखद वर्तमान से…!! वर्तमान,जो स्वतंत्र है विगत की परछाइयो... »

दोहरा चरित्र

जब भी प्रेम करने वालों को कोसा गया मैंने बंद कर लिए अपने कान… जब भी प्रेमियों पर अत्याचार किये गए मैंने मूँद लीं अपनी आँखें…!! जब भी किसी प्रेमी युगल ने देखा मेरी तरफ उम्मीद से, मैंने उन्हें निराश किया.. अखबारों में आये दिन छपने वालीं प्रेमियों के कत्ल की खबरें भी रहीं मेरे दिल पर बेअसर…!! अपनी कविताओं में प्रेम के क़सीदे पढ़ने वाले हम…. प्रेम की ताकत का बखान करने वाले हमR... »

सुख दुःख

एक विरोधाभास रहा है हमेशा से हमारी कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच..!! जहाँ कल्पनाएं सुख की मीठी नदी है, वहीं वास्तविकता दुःख का खारा सागर..!! मगर हम हमेशा वास्तविकता की अवहेलना कर चुनते हैं कल्पनाओं की नदी में गोते लगाना!! ये जानते हुए भी कि अनेकों नदियाँ अपना अस्तित्व खोकर भी मिटा नहीं सकती सागर के खारेपन को..!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ »

जय हिंद

मुल्क है हम हैं, समझ जा जमाने तू, देश माँ है, तू बेटा है, जुट रिश्ता निभाने तू। किसी भी हाल में भारत को हमने सींच देना है, जय हिंद का जेहन में सबके गीत देना है। »

चुप रहे

वे न बोले हम न बोले चुप रहे, सच के आगे आज भी हम छुप रहे, रोशनी में डाल कर पर्दा बड़ा बस अंधेरे के ही नगमे लिख रहे। »

कब तलक

कब तलक फूंकती रहेंगी गाड़ियां कब तलक यह आग सी मन में रहेगी, कब तलक सब ठीक होगा देश में, कब दिखेंगे लोग सच्चे वेश में। »

अभिलाषा

ये सृष्टि हर क्षण अग्रसर है विनाश की ओर… स्वार्थ, वासना और वैमनस्य की बदली निगल रही हैं विवेक के सूर्य को..!! सुनो! जब दिन प्रतिदिन घटित होतीं वीभत्स त्रासदियाँ मिटा देंगी मानवता को जब पृथ्वी परिवर्तित हो जाएगी असंख्य चेतनाशून्य शरीरों की भीड़ में…!! जब अपने चरम पर होगी पाशविकता और अंतिम साँसे ले रहा होगा प्रेम… जब जीने से अधिक सुखकर लगेगा मृत्यु का आलिंगन…!! तब विनाश के उन ... »

सुबह

मुस्कुराहट प्रकृति की सुबह सुबह दिखती है उठो जागो जाग भी जाओ कहती है। साथ में चिड़ियों की चहचहाहट भी संगीत की लय में रहती है। »

खाएंगे

मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़ गए पर गए कहां यह पता नही, पता होता तो हम उन्हें बुलाते, अब घर सूना सूना लगता है, कवियों के बिन सावन अपना रुखा रुखा सा लगता है| जो जुड़े हुए हैं ईश्वर उनके साथ रहो, जो जुड़ कर चले गए – ईश्वर उनको मेरा पैगाम सुना दो, कोई याद किया है कविता शायरी... »

नैराश्य

खुशियां सदा अमावस की रात की आतिशबाजी की तरह आईं मेरे जीवन में… जो बस खत्म हो जाती है क्षण भर की जगमगाहट और उल्लास देकर… और बाद में बचता है तो एक लंबा सन्नाटा और गहन अँधेरा…. वहीं नैराश्य मेरे जीवन में आया किसी धुले सफ़ेद आँचल पर लगे दाग की तरह ..!! जो शुरुआत में तो बुरा लगता है परंतु धीरे धीरे लगने लगता है उस आँचल का अभिन्न हिस्सा…!! वस्तुतः ‘नैराश्य’ मेरा स्थायी... »

अरी वो धूप

अरी वो धूप तुम क्यों डर गई ठंडक से चीर कर आ जाओ हमें तपा जाओ, जीने की राह दिखा जाओ कुहरे को दूर कर आ जाओ। »

न बोलिये बात ऐसी

न बोलिये बात ऐसी कि डर जायें हम, आपको देखकर चूक कर जायें हम। देखिए लाल आंखों से यूँ मत हमें, जिससे कि सचमुच सिहर जायें हम। »

नववर्ष की शुभकामनाएं

नववर्ष की शुभकामनाएं हैं हमारी ओर से, जिन्दगी खुशहाल हो पल पल खिला हो आपका। स्वस्थ तन हो स्वस्थ मन हो खूब धन हो आपका। »

नया साल आ गया

नया आ गया.. पुराना साल हजारों दर्द दे गया कुछ सिखाया कुछ समझाया, और आँखों में आँसू दे गया नया साल आ गया… »

दोस्तों से मिलो मुस्कुराते हुए

गीत गाते हुए खिलखिलाते हुए यह सफर काट लो गुनगुनाते हुए। दूर करते हुए सारी नाराजगी दोस्तों से मिलो मुस्कुराते हुए। »

चाँदनी है दिखी

आज दिन में हमें चाँदनी है दिखी, तार झंकार दे रागिनी है दिखी। बात करते नहीं तो करें मत मगर आंख में चाह की कुछ नमी है दिखी। »

आप बेकार में यूँ खफा हो गए

आप बेकार में यूँ खफा हो गए दुश्मनों के हमारे सखा हो गए, प्यार में जो संजोये थे पल आपके नफ़रतों में सभी वे अदा हो गए। »

मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में

मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में विघ्न डालो नहीं आज आनन्द में, मन है कोमल, जरा भोलेपन में भी है आज डालो नहीं आप फिर द्वंद में। »

तुम्हारे बिना

तुम्हारे बिना पाना पाना नहीं है तुमसे अधिक कुछ खजाना नहीं है, तुम तो हो ताकत, तुम तो हो हिम्मत, तुम्हें पास रखना है गँवाना नहीं है। »

परम सुख मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने से

परम सुख मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने से कुछ नहीं रखा है गंदे ख्यालतों में ।।1।। ————————————- अब तक जो करते आये हो गंदे काम सब छूट जायेंगे तेरे ब्रह्मचर्य पालन करने से ।।2।। ————————————— दो राहों पर कभी एक साथ नहीं चला करो मेरे दोस्त कब तक अंदर की आव... »

दो गज़ ज़मीन

मै उनके गली में दो गज़ ज़मीन मांगी एक आशियाना बनाने को उसने इतनी बड़ी शर्त रखी कि , मैं दंग रह गया सोचने लगा मेरी इतनी औकात कहाँ जो उनकी ख्वाईश को हम पुरा कर सके मै वापस वहीं चला गया जहाँ आशिक़ गम की समंदर में डुबकी पे डुबकी आज भी लगा रहे है। »

लहरों ने किनारा पा ही लिया…

आखिरकार बुलंदियों का आसमां पा ही लिया… आखिरकार आसमां से एक सितारा तोड़ ही लिया… बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे, आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया… »

“एक ख्वाब जिया है मैंने”

किस्मत को आजमाकर एक ख्वाब जिया है मैंने आँसुओं को शराब- सा पिया है मैंने, यहाँ से दूर चला जाऊंगा मैं ये फैसला अब किया है मैंने… »

घड़ी

एक छोटी -सी डब्बी में नाचती हैं सूईयाँ बेशक बन्द होकर। पर नचाती है सारी दुनिया को अपनी हीं नोंक पर।। न ठहरती है कभी न कभी ठहरने देती है। ये तो घड़ी है ‘विनयचंद ‘ दुनिया को घड़ी बना देती है।। »

चमकती किरणों ने मुझे सहलाया

नई सुबह की पहली किरण ने मुझे जगाया हिलोरे देकर चांदनी रात ने था सुलाया हटाये पर्दे जब माँ ने खिड़कियों से धूप की चमकती किरणों ने मुझे सहलाया… »

मन के घाव

मन के घाव भी भरने जरूरी हैं तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं ! मिलना जरूरी है… »

प्रभु

जरूरी है मन का झुकना प्रभु नहीं मिलते हैं, मात्र सिर झुकाने से.. »

क़हर

एक तरफ कर्ज तो दूसरी तरफ महामारी करोना। कैसे जिये हम यही कहता है आज सारा ज़माना।। कमाते है हम तब ही दो वक्त की रोटी मिलती है। न काम है न पैसा है अगर है तो करोना का डर है।। स्कूल कालेज सब बंद हुए शिक्षक विद्यार्थी मारे गये। अनेक बच्चों के भविष्य बन कर भी आज बिगड़ गए।। »

धन्वन्तरि जी को प्रणाम

जिन्होंने दूर अनेकों रोग किये औषधियों पर कितने शोध किये उन धन्वन्तरि को नमन करती है प्रज्ञा जिन्होंने लाखों तन नीरोग किये.. »

गंगा काशी

माँ बाप को दु:ख न देना उसने ही तुम्हें चलना सिखाया जिस पैर पर चल कर तुमने कामयाबी हासिल की उसी पैर पर उसने कभी अपनी जान न्योछावर किया । हंसना सिखाया बोलना सिखाया आज तुम हो गए इतने बड़े कि डांट कर बोलती बंद कर देते हो उसे अपनो से कमजोर समझ के। तीर्थ कर के तीर्थराज बनते हो अरे नादान सारे तीर्थस्थान तो तेरे घर में विराजमान है अपनी काली पट्टी तो खोल देख गंगा काशी तेरे घर में है। »

वफा के बदले

खट्टी मीठी यादों से आज उस बेवफा की तस्वीर बनाई। दिल में आ कर देखिए दूर हो गया आज सनम हरजाई।। अक्सर मैं सुना करता था प्यार में रब बसता है। गर रब बसता है तो मैने मुहब्बत में धोखा क्यों खाई।। »

*उपहार*

आपको मिलता है जो, देखभाल और प्यार आपके ही व्यक्तित्व को, हमारी ओर से है उपहार.. *****✍️गीता »

दुःख

मैं हमेशा दुःख से कतराती रही, इसे दुत्कारती रही मगर ये दुःख हमेशा ही मिला है मुझसे बाहें पसारे…!! मैं भटकती रही चेहरे दर चेहरे सुख की तलाश में… और वो हमेशा रहा एक परछाई की तरह जो दिखती तो है मगर क़भी कैद नही होती हाथों में…!! दुःख बारिशों में उगी घास की तरह है जिसे हज़ार बार उखाड़ कर फेंको मगर ये उग ही जाता हैं दिल की जमीं पर..!! सुख ने हमेशा छला है मुझे एक मरीचिका की तरह… मगर... »

गरीब की दीवाली

गरीब के घर में झांकीए कैसे मनाते है निर्धन दीवाली। मन में उमंगों की पटाखे फोर कर निर्धन ऐसे मनाते है दीवाली ।। दीया है बाती है मगर तेल नहीं लाला भी आज उधार देगा नहीं। मन में ख्वाईशें तो थी अनेक चलो यह वर्ष न सही अगले वर्ष ही सही।। मुनिया की मम्मी मुनिया के पुरानी कपड़े धो देना क्योंकि,। आ गयी है इस वर्ष की दीवाली।। »

एक ही दीया

हम सब दीप तो जलायेंगे, बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए। मगर हम वो दीप कब जलायेंगे मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।। हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ घर आंगन में जलाते है अनेक दीया। छल कपट के छाती पर कब हम जलायेंगे स्वच्छता के “एक ही दीया” ??।। »

वाह !! कहीं कहीं…..

कहीं दीप जले तो कहीं , गरीब के घर में चूल्हा न जले। हम खुशियाँ मनाते रहे और वो, अंधेरे में माचिस खोजते रहे।। कहीं दीपावली की धूम तो कहीं पापी पेट में भूख की शहनाई। गगन में देखो रंग बिरंगी पटाखे वाह रे दुनिया क्या मस्ती है छाई ।। »

गरीब के लाल

नये कपड़े, नयी उमंग, पटाखे और डिब्बे की मिठाई । गरीबी में पल रहे लाल के किस्मत में कहाँ है भाई ।। दीप जला कर खेल कूद कर। अपनी शौक को खुद में ही, कभी सिमटते हुए देखा है भाई?।। »

क्या से क्या हो गया

हम दीवाली क्या मनाए दीवाली तो करोना ले गए। थी जुस्तजू मुझे भी मगर साल २०२० हमें बर्बाद कर गए।। हमे क्या पता था देश में कभी ऐसे भी दिन आयेंगे। बुरे वक्त पे रिश्ते नाते भी अपनो के साय से दूर भागेंगे।। »

दु:ख

कभी कभी दु:ख को गले लगा कर भी जीना पड़ता है। तभी तो सुख से ज्यादा इस जहाँ में दुःख की महता है।। जब तक इंसान के जीवन के धड़कन की डोर चलती है। तब तक ए अमित रंग बिरंगी दु:ख हमारे साथ कहाँ छोड़ती है।। »

प्रेम का सागर

उसकी आँखों में झलकता है, उसके दिल मे बसे सागर का चेहरा !! दुःख की उद्दंड लहरें अक्सर छूकर, भिगोती रहती हैं पलकों के किनारों को !! उस सागर की गहराई में बिखरे हैं, बीते हुए लम्हों की यादों के लाखों मोती !! वो सागर है प्रेम का मगर अधूरी उसकी प्यास है, एक राह से भटकी नदिया से मिलन की उसको आस है!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ (03/10/2020) »

दोस्त

अगर खुदा तुमने , लाखों तकलीफें दी हैं; मानुष को! तो कोहिनूर से दोस्त भी दिए हैं, उनकी मोजुदगी ही है, जो मुझे आस्तिक बनाती है। »

प्यार की कहानी

तपकर धूप से मुझमें निखार आया है, शोलों पर चलकर अब सम्हलना आया है। कायनात में लिखूँगी अपने प्यार की कहानी, जुनून से अपने अब यह विश्वास आया है। »

किया है प्यार

किया है प्यार तो इकरार से इन्कार क्या करना। है मरना शौक़ बचने का जतन बेकार क्या करना। तेरा आगोश ही मझधार बनकर गर डुबाता हो, तो आशिक़ दिल ये कहता है कि दरिया पार क्या करना। संजय नारायण »

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