मुक्तक

करवा चौथ

आज बहुत सुन्दर लग रही हो तुम इस चाँद से चेहरे पर कुछ कहना चहुँ तो पहले ही शर्मा कर हाथो से चेहरे को ढक लेती हो तुम. मुझे देखकर जो तेरे चेहरे की लालिमा बढ़ती जाती है देख- देख तुझे मेरे दिल की कलि खिलती जाती है. सबको रात का इंतजार है देखने चमकते चाँद को दिल बेक़रार है इतना सुन्दर श्रृंगार किया है दिल तो लूटने को भी तैयार है. आज सुनती सभी महिलाये करवा चौथ की कहानी सुनो प्रिया, श्रृंगार सहित श्रृंगार रह... »

कर्मठ

आलसी लोग जो ना मेहनत करते दिन के उजयारो मे देखा रात को स्ट्रीट लाइट के निचे पड़ते एक बच्ची को अंधरे गलयारो मे. सर्द हवाओ में मैंने उसे देखा पढ़ते कांप -कांप कर जाने क्यों पढ़ती है वो जागकर रात- रात भर. इतनी ठण्ड थी की कोई अभागा रोए तो आंसू भी जम जाए इस हाल में पढ़ते देख उसे किसी की सांसे भी थम जाए. अगली सुबह मैंने उसे जब उसे फूल बेचते देखा सोचा मन मे की ये कैसा है भाग्य का लेखा एक दिन जरूर बदल देगी वो... »

देश का कण- कण- स्वर्ण महान है

हिमालय ताज सर पर सजा डटकर खड़ा अम्बर में सटा स्थिरता जिसकी पहचान है ऐसा ही हर भारतीय का रुझान है क्योंकि इस देश का कण-कण-सवर्ण महान है नम्र ह्रदय उच्च विचार मानते हम अतिथि को भगवान है प्रतिभा ऐसी कूट -कूट भरी जानकर दुनिया भी हैरान है क्योंकि इस देश का कण-कण-स्वर्ण महान है. सुन्दर- नदिया, बहते -झरने स्वर्ग से लगी सीढ़ी के समान है सुंदरता फैली हर कण मे मुश्किल करना इसका बखान है क्योंकि इस देश का कण कण... »

सन्तुलन

सन्तुलन

दिल और दिमाग के बीच सन्तुलन बैठाना मुश्किल था, पहली बार देखा था उसे अमलन छुपाना मुश्किल था, अकेले ही काटी थी यूँही राहों पर उम्र भर जो जिंदगी, मिला जो उनसे तो ठहरी अंजुमन लगाना मुश्किल था।। राही अंजाना अंजुमन – सभा अमलन – सच में »

मुक्तक

मुक्तक

धड़ाधड़ अंधाधुन हो रहा पेड़ों की कटाई, मूक बाधिर बने रहे तनिक लाज नहीं आई, सूलग रहा आरे आज राजनीति के करतुतो से, पर्यावरण प्रेमी को दबोच रहें हैं आरे कालोनी से, महेश गुप्ता जौनपुरी »

जीवन

जीवन

जीवन हर पल एक खेल होता है। यहाँ सभी के कर्मों का मेल होता है। जिंदगी के खेल बड़े निराले होते हैं। किश्मत का हर सिक्का हेड, टेल होता है। इस खेल में तो कोई पास तो कोई फैल होता है। »

गरीब कवि

भूखे पेट जीना सीखा मैंने पेट भर खाने की जरुरत भी समझी नहीं | नंगे पैर दौड़ पड़े सफर में बस भागता रहा ना देखा, पाँव में चप्पल है के नहीं | बुझी मशालों को मैंने शब्दों से जाला डाला इतनी भड़का दी आग के सूरज के आगे, इसकी चमक कभी धुंधली पड़ी नहीं | धरती से चाँद तक मैंने लिख डाला ब्रम्हांड को भी छू लेता पर छलांग लगाने के लिए गरीब कवि के पास दो गज ज़मीन भी नहीं. “”””””̶... »

मोर पखा

मोर पखा

मोर पखा सिर धरने वाले । उंगली पर गिरी रखकने वाले । है कान्ह हे नंद दुलारे हे यशुमति के प्यारे। कृष्णा, मोहन , श्याम सब हैं तेरे नाम द्वारिका, मथुरा , वृंदावन हैं तेरे धाम । हे मेरे प्यारे ये जान, जिगर , दिल, है सब , दिलवर हे तेरे नाम। »

पता

जलाकर रख दिए ख़त मगर यादों को अग्नि दगा दे गई, मुट्ठी में दबाकर रखी थी मगर खुशबू को हवा उड़ा ले गई, बेबाक यूँही नशे में गुज़र रही थी लडखड़ाती हुई ज़िन्दगी, आई एक रात फिरजो ख्वाबों में मुझे तुम्हारा पता दे गई।। राही अंजाना »

हौसले

हाथ की आड़ी टेड़ी लकीरें क्या खाख बताएगी तकदीरे उड़ जा होंसलों के आसमान में क्या बिगड़ लेंगी जर्ज़र समाज की जंजीरे 🌋🗽♨️✈️🚀⏳️ »

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