मुक्तक

क्रांति की धारा

मेरे देश मुझे तेरे आंचल में अब रहने को दिल करता है जो जख्म दिए अंगारों ने उसे सहने को दिल करता है कांटो पर जब तू चलता था हम चैन से घर में सोते थे हम देश पराए जाते थे तेरी आंख में आंसू होते थे क्रांति की आग में अर्थी थी यह खून से रंग दी धरती थी हर मां की आंख में आंसू थे चौराहे लाश गुजरती थी सीने पर जख्म हजारों थे सुनसान यह गलियां रहती थी यह वेद कुरान भी ठहर गए आंसू की नदियां बहती थी मैंने हिमालय की... »

प्रेम

🌺”प्रेम एक पूर्ण शब्द है अपूर्णता से पूर्णता की ओर ले जाने वाला। जितना अधूरा उतना कामयाब अखंड ज्योति सा हृदय में उम्र भर सुलगने वाला।”” – निमिषा🌺 »

मुक्तक

ज्यादा मजबूत हृदय का दावा करने वाले अक्सर बंद कमरे में रोया करते हैं। निमिषा सिंघल »

साथी

पलके तेरी झुकी थी, ओठों पर था तुफान। संग चलने का इरादा किया, मुझ पर था एहसान। इस कदर एक साथ में चलें, हर मुश्किल हालात में चलें। आई जितनी परेशानियाँ, उन्हें कुचल हर हाल में चलें। धीरे-धीरे ही सही, वर्ष कई बीत गयें। कई उलझनें भी आई, कदम हमेशा टिक गयें। जब भी मैं भुखा रहा, तुम भी भुखी सोई थी। ढ़ाढस बंधाकर तुमने, हर दु:ख हमारा धोई थी। तेरे जैसे साथी पाकर, धन्य हुआ भाग्य हमारा। तुझपर मैं लुटा दूँ, अगले... »

आशियाना

हमने बुलाया भी नहीं तो तुम आये भी नहीं ये दिल तो तुम्हारा आशियाना था हमनें रोका भी नहीं तो तुम ठहरे भी नहीं »

वक्त का मारा

वक्त का मारा हूं,हालात का मारा हूं मौत भी आ जाए तो गम नहीं ए दोस्त! मैं तो जिंदगी का मारा हूं »

नया साल

गुजरे कल की बातें लेकर तुम भी क्या बैठे रहते हो नया साल आने वाला है तुम आज भी कल में जीते हो। »

बज़्म

जीने को यूँ जीती हूँ जैसे कोई गुनाह किये जा रही हूँ मैं। गीत भी गा रही हूँ, ईद भी मना रही हूँ। ज़िन्दगी की बज़्म फ़िर सजा रही हूँ मैं। »

दिल की बस्ती

खुश रहने की वजह ढूंढ़ोगे, तो कम ही मिलेंगें। यहाँ हर चेहरा हस रहा बाहर से, पर अन्दर तो गम ही मिलेंगें।। झाँक कर देखोगे दिल की बस्ती में, तो बस खाली शहर ही मिलेंगें। ‘ नवीन’ नही कोई जहाँ में अपना , यहाँ बस पराये ही मिलेंगें।। »

जीवन की बगिया

फूलों से भी ज्यादा कोमल है ह्रदय शब्दों के बाण से मत छेदो प्रेम की रसधार से जीवन की बगिया सींचो »

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