मुक्तक

1 मेरे दिल से खिलवाड़ ना कर.. मैं तूफान का जलजला हूँ मुझसे प्यार ना कर.. 2 बढ़ती उम्र के साथ जिद समझौतों में बदल…

Khayal

उसके होंठों को जब तुमने प्यार से चूमा होगा । ❤ खयाल एक पल को मेरा भी तो आया होगा । ❤

तलवार।

वह कैसी तलवार कि जिसमें धार नहीं है कौन कहेगा सिन्धु जहाँ मझधार नहीं है, सिर्फ ताप के लिए जले वह ज्वाला कैसी आँखों से…

मुक्तक

आजकल थोड़ा खफा सा रहता है जग रहा मगर सोया सा रहता है पर जाने क्या है मजबूरी उसकी वो बैठा हुआ थका सा रहता…

*किताबें और कलम*

किताबें और कलम होती हैं हमारी मार्गदर्शिका* हमारे जीवन में निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका* ताउम्र हम सीखते हैं इनसे, ये हैं हमारी विरासत मानव विकास…

नजर जब

नजर हो यदि कभी टेढ़ी विधाता की तुम्हारे पर, उन्हें बस हाथ जोड़े तुम जरा प्रणाम कर लेना, सभी कुछ आपका ही है यही कह…

चींटी

चींटी को देखिए कितनी है अदभुत अनोखी हैं टांगें आंखें हैं अदभुत। अस्तित्व उसका ईश्वर ने सजाया चींटी का संसार रब ने बनाया।

हृदय

हृदय देह के जीवित रहने में सहायक एक अंग मात्र नहीं है..!! अपितु, यह वो स्थान है जहाँ प्रस्फुटित होते हैं उन कोमल भावनाओं के…

कलम’

अन्दर की बातें बाहर करने वाले नजरों से गिर जाते हैं, बस एक कलम है जिससे मोहब्बत बढ़ती जाती है।

प्रेम

प्रेम से अधिक प्रिय कोई एहसास नहीं जो इसे नहीं समझते उनसे प्रेम की आस नहीं। बसाया कभी था जिसको ह्रदय में, अब उसी को…

हरियाली

तुम्हारी तरह खूबसूरत, हरियाली, खुशहाली चारों तरफ, खिली हुई है, प्रेम की हवा चल रही है, दर्द की दवा बन रही है, यूँ ही दिखते…

ख़ामोशियाँ

यूँ तो ख़ामोशियों की कोई ज़ुबान नहीं होती लेकिन… प्रेम में ख़ामोशियों को समझना बहुत मायने रखता है l अगर एक दूजे की ख़ामोशियों को…

पिता दिवस

जीवन भर बिना थके,मुस्कुराते हुए अपने संघर्षरत बच्चे को कांधे पर उठाकर चलने वाले पिता का पर्याय बन सके, ऐसा बिंब, रचा ही नहीं गया…

मेरे बाबू जी

जिनके बिना मेरा नाम अधूरा जिनके साथ मेरा परिवार पूरा वो छत है बाकी सब दीवारें है एक उन्होंने पूरे घर के सपने सँवारे है…

कहते मेरे है

एक छत है मगर अलग अलग कमरे है कही गम कही खुशी कही बेखबरी सभी अलग अलग चेहरे है कोई नही जानता रात किसकी कैसी…

बसंत बहार

बरसेगी धरती पे कब सावन के फुहार। बता ए घटा कब आएगी बसंत बहार।। मोर पपीहा भी मिलन के गीत गुनगुनाने लगे। मन के बगिया…

वादा

जब ज़िन्दगी कर रही होगी अंत निर्धारित हमारी कहानियों का जब वक्त की धुंध छँट जायेगी और साफ़ नज़र आने लगेगा चेहरा मौत का..!! जब…

आधुनिका नारी

नारी के नवोन्मेष पर ————————– चाँद ने पलकें उठा कर देख तो लिया है अब~ पश्चिम से आते प्रकाश को, पर आधुनिका को यह स्वीकार्य…

तुम्हारे हाथ

नदियाँ- सागर, सहरा- पहाड़, पानी-प्यास, सूखा- बरसात, तितली-फूल, छाया- धूप पंछी- आकाश, जंगल- उजाड़ सबकी पीड़ाओं को आश्रय दिया है तुम्हारे हाथों ने कहो प्रेम!…

नज़दीकियाँ

क्या मापदंड हैं नज़दीकियों के कितनी नगण्य है दो लोगों के बीच स्थित भौगोलिक दूरी जिनके दिल धड़कते हैं एक ही लय में..!! और कितना…

आहट होते ही

कुएं का मेंढक समझता है और आएं नहीं मैं ही टर्राते रहूँ, राज अपना समझ कर और पर गुर्राते रहूँ। दूसरों के आने की आहट…

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