मुक्तक

संदेश ख्वाबों का

रात की दीवार पर लिखा ख्वाबों का संदेश ए चंदा पहुंचा देना ‘अपने’ रहते परदेस….. »

इंतज़ार

इंतज़ार झिलमिलाता रहा रातभर आंखों में! तुम नहीं तुम्हारा पैग़ाम आया ‘आज न सही, कल की बात रही’। चलो मान लेते हैं; एक और झूठ तुम्हारे नाम पर जी लेते हैं »

लोग कहते हैं

लोग कहते हैं कि मैं बड़ा कमाल लिखती हूँ मैं उसका ही दिया हर दर्द उसके नाम लिखती हूँ »

मेरी साँस बाकी

रात भी खत्म हो गई बस तेरा जिक्र बाकी है तूने तो मुझे मार डाला पर मेरी साँस बाकी है »

ख्वाहिशों के जुगनू

ख्वाइशों के जुगनू पकड़कर बोतल में बंद कर दिए चिराग दिल के बुझाए बैठे हैं रफ्ता रफ्ता चल रही हैं सांसें सारे ख्वाब छुपाये बैठे हैं »

खामोशी

खामोशी भी एक सिलसिला -ए-गुफ्तगू ही है खैर छोड़ो तुम्हारे बस की बात नहीं……. »

रब का वास्ता

मैनें हर रिश्ते को शिद्दत से निभाया है जिसने मुझे प्यार किया उसे अपनाया है जिसने दिल से जाना चाहा उसे, उसे रब का वास्ता भी दिलाया है । »

इंतेहा खत्म हुआ

इंतिहा खत्म हुआ मेरी बेसब्री का मुलाकात भी हुई उनसे मगर कोई बात ना हुई वह आकर चले गए मगर मेरे होंठ सिले के सिले ही रह गए »

त्योहार मिलन का

बैर भाव से ऊपर उठकर आओ रंग लगाते हैं, होली है त्यौहार मिलन का मिलकर इसे मनाते हैं। »

हम चिलमन से

हम चिलमन से ही झांकते रह गए वो रंगने हमें आये थे पर पड़ोसन को रंग गए »

मोहब्बत का आशियाना

एक उनके खातिर हमने मोहब्बत का आशियाना बनाया था वो आए और ढहा कर चले गए…. »

तौबा

किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा । »

हम रंग नहीं खेलते

हम रंग नहीं खेलते कुछ बात हो गई हम राज़ नहीं खोलते कुछ बात हो गई मिली जब नज़र उनसे फिर नज़र ना हटी हम देखते ही रह गए कुछ बात हो गई »

नजर तो आओ कभी

नज़र तो आओ कभी नज़र को नजरों से मिलाओ कभी सपने तो बहुत दिखाये तुमने, एक सपना सच कर जाओ कभी। »

रात पर छाई खुमारी

रात पर छाई खुमारी बौने सपने हो गये उम्र बीती तेरी आरजू में सपने सपने हो गए »

हौसले

मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं »

मुक्तक

एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का एहसास रूह ❣️ तमन्ना का एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का एहसास तुम्हारे 💞दिल💞 के धड़कन का एहसास 🤝विश्वास🤝 के शब्दों का एहसास 💔अनजाने❣️ रिस्तो का महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

भाल लेकर तैनात रहो, भारत देश के जवानों तुम, जीभ खिंच कर काट लो, जो देश के खिलाफ बात करें। महेश गुप्ता जौनपुरी »

स्वेद

अपने स्वेद से सींच कर बोई थी मोहब्बत की फ़सल शक के एक झोंके ने सब बर्बाद कर दिया। »

क्या????

क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी गुनाह है जब वक्त होता है तो कह सुन लेते हैं हम यारों से। »

चलो तुम

चलो तुम जीत जाओ हमें हराकर यही खुशी है तुम्हारी तो हम तुमसे हार कर भी जीत जायेगें । »

शिद्दत

बड़ी शिद्ददत से लगे है वो हमे हराने मे हमे भी अब अंजाम का इंतजार है………. »

श्याम मेरे

श्याम मेरे तेरा साँवला रंग मेरे मन को मोह गया तू दिल में मेरे बसा रहा और आंखों का काजल बहता रहा …. »

सहारा तिनके का

गहराई का आलम न पूछो दोस्त ! सहारा तिनके को है या तिनके का सहारा किसी को न मालूम……… »

नजर को नजर

नजर को भी नजर लग जाएगी उसकी नुमाइश इतना भी ना करो……. »

स्त्री हूं पतंग नहीं

ऐ पुरूष सुन! स्त्री हूं पतंग नहीं कि जिसकी डोर सदैव तुम्हारे हाथ में रहेगी……. »

सुना है

सुना है साथ छोड़कर जाने वाले आज अकेले हैं, कमबख्त मुझ में भी अब दोबारा धोखा खाने की हिम्मत कहां है…….. »

क्षणिकाएं

1. कदम छोटा हे या बड़ा हर मोड़ पर इंतज़ार है ज़िंदगी को – चुन लिए जाने का 2. राम लिखा सुनहरा इतिहास ने तुम्हारा नाम ; तुमने – गढ़ ली सीता सोने की ! ( तज दी सीता सोने सी !!! ) »

क्षणिकाएं

1. पहली ही सीढ़ी पर एहसास हुआ, सर पर खुला आसमां हो भले ही अब – पैर तले ज़मीन नहीं 2. चाहे-अनचाहे उग आए हैं संबंधों में अपरिचय के विंध्याचल ; हम भी जो पा लेते थोड़ा सा अगस्त्य का बौनापन !!! »

छुप कर

छुप कर आंसू बहाते हैं रो-रोकर जातेहैं सपने मेरे तड़पकर टूटते जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं »

तुम्हें क्या पता

तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को शीशा समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है। »

कोहिनूर

तुम्हें क्या पता के हमें छोड़ कर तुमने क्या खोया है कोहिनूर को पीतल समझ कर तुमने हीरा खोया है। सिर्फ़ उसे पाने की खातिर जो चन्द दिनों के लिए तेरा है। »

फितरत

हर रोज़ बदलता है वो अपनी फितरत को कमबख्त सारे रंग एक जैसे ही हैं उसकी फितरत के…….. »

तस्वीर

जीवन की कड़वी सच्चाई एक माला चढ़ी तस्वीर में छिपी है कुछ समय पश्चात हो तस्वीर भी नहीं रहेगी। याद का क्या है याद तो आती जाती रहेगी, धूमिल हो जाएगी दूर जाती रेलगाड़ी की तरह। इस जग में अमर रहने के लिए, कुछ अच्छे कर्म जरूरी है। जो आपको जिंदा रखेंगे युगों युगों तक आपको सिर्फ तस्वीर नहीं बनना यह याद रहे। निमिषा सिंघल »

क्रांति की धारा

मेरे देश मुझे तेरे आंचल में अब रहने को दिल करता है जो जख्म दिए अंगारों ने उसे सहने को दिल करता है कांटो पर जब तू चलता था हम चैन से घर में सोते थे हम देश पराए जाते थे तेरी आंख में आंसू होते थे क्रांति की आग में अर्थी थी यह खून से रंग दी धरती थी हर मां की आंख में आंसू थे चौराहे लाश गुजरती थी सीने पर जख्म हजारों थे सुनसान यह गलियां रहती थी यह वेद कुरान भी ठहर गए आंसू की नदियां बहती थी मैंने हिमालय की... »

प्रेम

🌺”प्रेम एक पूर्ण शब्द है अपूर्णता से पूर्णता की ओर ले जाने वाला। जितना अधूरा उतना कामयाब अखंड ज्योति सा हृदय में उम्र भर सुलगने वाला।”” – निमिषा🌺 »

मुक्तक

ज्यादा मजबूत हृदय का दावा करने वाले अक्सर बंद कमरे में रोया करते हैं। निमिषा सिंघल »

साथी

पलके तेरी झुकी थी, ओठों पर था तुफान। संग चलने का इरादा किया, मुझ पर था एहसान। इस कदर एक साथ में चलें, हर मुश्किल हालात में चलें। आई जितनी परेशानियाँ, उन्हें कुचल हर हाल में चलें। धीरे-धीरे ही सही, वर्ष कई बीत गयें। कई उलझनें भी आई, कदम हमेशा टिक गयें। जब भी मैं भुखा रहा, तुम भी भुखी सोई थी। ढ़ाढस बंधाकर तुमने, हर दु:ख हमारा धोई थी। तेरे जैसे साथी पाकर, धन्य हुआ भाग्य हमारा। तुझपर मैं लुटा दूँ, अगले... »

आशियाना

हमने बुलाया भी नहीं तो तुम आये भी नहीं ये दिल तो तुम्हारा आशियाना था हमनें रोका भी नहीं तो तुम ठहरे भी नहीं »

वक्त का मारा

वक्त का मारा हूं,हालात का मारा हूं मौत भी आ जाए तो गम नहीं ए दोस्त! मैं तो जिंदगी का मारा हूं »

नया साल

गुजरे कल की बातें लेकर तुम भी क्या बैठे रहते हो नया साल आने वाला है तुम आज भी कल में जीते हो। »

बज़्म

जीने को यूँ जीती हूँ जैसे कोई गुनाह किये जा रही हूँ मैं। गीत भी गा रही हूँ, ईद भी मना रही हूँ। ज़िन्दगी की बज़्म फ़िर सजा रही हूँ मैं। »

दिल की बस्ती

खुश रहने की वजह ढूंढ़ोगे, तो कम ही मिलेंगें। यहाँ हर चेहरा हस रहा बाहर से, पर अन्दर तो गम ही मिलेंगें।। झाँक कर देखोगे दिल की बस्ती में, तो बस खाली शहर ही मिलेंगें। ‘ नवीन’ नही कोई जहाँ में अपना , यहाँ बस पराये ही मिलेंगें।। »

जीवन की बगिया

फूलों से भी ज्यादा कोमल है ह्रदय शब्दों के बाण से मत छेदो प्रेम की रसधार से जीवन की बगिया सींचो »

क्यों छोटी छोटी बातों को बड़ा बनाते हो

क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो? भोली-भाली जनताओं से बगावत कराते हो।। क्या कभी जनताओं को सत्य से रुबरू कराते हो? कोड़े कागज पर दस्तखत से पहले शर्त समझाते हो? फिर क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो? जनताओं को हथियार की तरह इस्तेमाल मत करो। भारी पलड़ा से उठा -उठा कर अपनी जेब मत भड़ो।। हल्के को भारी करने का क्या यही एक तरीक़ा है? दंगा और बगावत फैला कर जीवन का रंग फीका है।। जब हर बात बात ... »

माँ

माँ

ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है! मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है! माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा- सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख लेती है! राजेन्द्र मेश्राम “नील” »

न्याय

ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई। ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई। तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय, दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए। देवेश साखरे ‘देव’ »

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा उजालों को नफरत है क्यों, फैला है अँधेरा इश्क़ में जलकर, चलो चांदनी रात करें आओ हम मोहब्बत क़ी बात करें »

आरजू

क्या आरजू है दिल की क्या बताएं बस इक आह है जो दिल में बसी है »

तुम धूप बुला लो

आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो, तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो, अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम, ये रात ढ़ल जायेगी गर, तुम धूप बुला लो ।। copyright@ नील पदम् »

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