मुक्तक

न्याय

ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई। ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई। तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय, दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए। देवेश साखरे ‘देव’ »

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा उजालों को नफरत है क्यों, फैला है अँधेरा इश्क़ में जलकर, चलो चांदनी रात करें आओ हम मोहब्बत क़ी बात करें »

आरजू

क्या आरजू है दिल की क्या बताएं बस इक आह है जो दिल में बसी है »

तुम धूप बुला लो

आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो, तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो, अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम, ये रात ढ़ल जायेगी गर, तुम धूप बुला लो ।। copyright@ नील पदम् »

राही

शब्दों से शब्द निकलते जाते हैं, रिश्ते रिश्तों को समझते जाते हैं, चलती है इसी रफ़्तार से ज़िन्दगी, राही हम सब आगे बढ़ते जाते हैं।। »

कामयाबी

चुप मत रहो इतना के नाम गुम नाम हो जाये, तुम्हारे हिस्से की ज़मी किसी के नाम हो जाये, नाकामयाबी के सफर से बाहर निकल आओ, कहीं ऐसा न हो कामयाबी की शाम हो जाये।। राही अंजाना »

बत्ती

बत्ती लाल नीली पीली का फर्क जानते नहीं, कुछ मेरे देश के युवा खुद को पहचानते नहीं, जिंदगी के चौराहे पर खड़े ट्रैफिक हवलदार, जैसे खुद के बनाये नियमों को मानते नहीं॥ राही अंजाना »

वक्त्त

सावधान करती हूं कवियों को ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग हवा झूठ की चल पड़ी है सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग. कितना समझा लोगे तुम उनको जमाना बहुत ही संगदिल है जिस तरह गीले कागज पर शब्दों का लिख पाना मुश्किल है. सच्चा साथ निभा कर दुआएं बहुत सी ले आना धन दौलत कमा कर क्या करोगे मुश्किल है इसको ऊपर ले जाना. झूठ का चाहे कितना भी चढ़े फितूर सच की राह पर चलना हुजूर वक्त तो रेत की तरह फिसलता रहता है एक दिन व... »

घरोंदा

उड़ने नहीं दोगे आज तो कल उड़ना भूल जाएंगे, परिंदे अपनी ही शाख से मिल जुलना भूल जाएंगे, घर बनाने के हुनर के साथ जो पैदा हुए हैं बन्दे, गर पिंजरे में बन्द रहे तो घरोंदा बुनना भूल जाएगे।। राही अंजाना »

बागी

अपनी ही आजादी के आदी बन गए जाने हम क्यों बागी बन गए बेबसी की रस्सी पर लटक कर कई ख्वाब मेरे खुदकुशी कर गए. धकेलो कितनी भी जोर से मुझे संभलना सीख गई हूं मैं मुझे जलाना मुश्किल होगा कागज की तरह भीग गई हूं मैं. ऐ खुदगर्ज जमाने जो तुम मेरा दिल ना दुखाते तो मेरे शब्द यूं शोले ना बरसाते उडूं मै आसमान में या तेरुं बहती नदी में मिले हो तुम हमेशा मेरी राह में जाल बिछाते. कलम की नोक को सूई की तरह चुभाया दुश्... »

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