मुक्तक

वक्त का मारा

वक्त का मारा हूं,हालात का मारा हूं मौत भी आ जाए तो गम नहीं ए दोस्त! मैं तो जिंदगी का मारा हूं »

नया साल

गुजरे कल की बातें लेकर तुम भी क्या बैठे रहते हो नया साल आने वाला है तुम आज भी कल में जीते हो। »

बज़्म

जीने को यूँ जीती हूँ जैसे कोई गुनाह किये जा रही हूँ मैं। गीत भी गा रही हूँ, ईद भी मना रही हूँ। ज़िन्दगी की बज़्म फ़िर सजा रही हूँ मैं। »

दिल की बस्ती

खुश रहने की वजह ढूंढ़ोगे, तो कम ही मिलेंगें। यहाँ हर चेहरा हस रहा बाहर से, पर अन्दर तो गम ही मिलेंगें।। झाँक कर देखोगे दिल की बस्ती में, तो बस खाली शहर ही मिलेंगें। ‘ नवीन’ नही कोई जहाँ में अपना , यहाँ बस पराये ही मिलेंगें।। »

जीवन की बगिया

फूलों से भी ज्यादा कोमल है ह्रदय शब्दों के बाण से मत छेदो प्रेम की रसधार से जीवन की बगिया सींचो »

क्यों छोटी छोटी बातों को बड़ा बनाते हो

क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो? भोली-भाली जनताओं से बगावत कराते हो।। क्या कभी जनताओं को सत्य से रुबरू कराते हो? कोड़े कागज पर दस्तखत से पहले शर्त समझाते हो? फिर क्यों छोटी -छोटी बातों को बड़ा बनाते हो? जनताओं को हथियार की तरह इस्तेमाल मत करो। भारी पलड़ा से उठा -उठा कर अपनी जेब मत भड़ो।। हल्के को भारी करने का क्या यही एक तरीक़ा है? दंगा और बगावत फैला कर जीवन का रंग फीका है।। जब हर बात बात ... »

माँ

माँ

ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है! मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है! माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा- सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख लेती है! राजेन्द्र मेश्राम “नील” »

न्याय

ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई। ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई। तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय, दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए। देवेश साखरे ‘देव’ »

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा उजालों को नफरत है क्यों, फैला है अँधेरा इश्क़ में जलकर, चलो चांदनी रात करें आओ हम मोहब्बत क़ी बात करें »

आरजू

क्या आरजू है दिल की क्या बताएं बस इक आह है जो दिल में बसी है »

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