मुक्तक

मजदूरो के बच्चे

मेरे घर के सामने मजदूरो का जमावड़ा लगा था ईंटो का ढेर बड़ा था शायद कोई बंगला बन रहा था. कोई मजदूर ईंटे ढो रहा था कोई दीवार चिन रहा था हर मजदूर काम मे लगा था बच्चों की कोई परवाह नहीं कर रहा था. हम अपने बच्चों को धूल भी नहीं लगने देते है और मजदूरो के बच्चे देखो किस तरहा मिटटी मे लेटे है. मिटटी उड़ा उड़ा कर खेल रहे है मजदूरों के बच्चे सब अपने कर्मो का खाते ये कहते है हम वचन सच्चे गाढ़ा पसीना बहाया अपने पर... »

पथिक

जीवन की राह को नंगे पैर ही नापना पड़ता है मिटटी की गर्मी को छूकर ही भापना पड़ता है चलते चलते कभी रेत के टीले राह रोक लेते है मै डर जाऊ मै घबराऊ इसका ही तो मजा लोग लेते है राह मे कांटे आए जब रोता चलता रहा मै पथिक पर जीना छोड़ दू मन मे विचार ना आया तनिक. सारा मनोबल टूट गया मेरा जब राह मे एक बड़ा पत्थर आया उससे भी मै बच गया क्योंकि साथ था मेरे माँ-बाप का साया. एक मोड़ पे मुझे कुछ लोग मिले नेंन उनके ईर्ष्य... »

मुक्तक

मन्दिर बांटा मस्जिद बांटा बांट दिया संसार, बोली भाषा रहन सहन बांट दिया इंसान , जाति धर्म मजहब बांट दिया भगवान , ईश्वर अल्ला का धर्म बताकर कर दिया सत्यानाश , महेश गुप्ता जौनपुरी »

चन्द्रयान

हौसले कि उड़ान अभी बाकी है , मेरे जज़्बातों का ख्याल अभी बाकी है , चन्दा मामा हम फिर से आयेंगे , अभी मेरे दिल का हाल बाकी है , महेश गुप्ता जौनपुरी »

नशा

तू होनहार था तू सबसे होशियार था सबका तू गुरुर था अपनी प्यारी सी जिंदगी मे सपना तूने भी कोई देखा तो जरूर था झुक गया गमों के आगे दुनिया नाचे पैसे के आगे तब तो तू मजबूर था क्यों खोया लत मे ऐसा बहाया पानी की तरहा माँ-बाप का पैसा गुनाह करना भी तुझे मंजूर था तुझपे नशे का ऐसा भी क्या सरूर था छूटते जा रहे अपने तोड़े क्यों तूने अपनों के ही सपने ये करना क्या जरूर था तू इतना क्यों मजबूर था भागता रहा बस नशे के... »

तू मेरा छोटा भाई है

जब तू पालने मे खेलता था कई खिलोने तेरे सराहने रहते थे खुश होती तुझे देख- देख मेरे नन्हे हाथ तेरे सर को सहलाते रहते थे. जब तू थोड़ा बड़ा हुआ मेरे खेल का साथी मुझे मिल गया टॉफी,चॉकलेट बांटकर खाने वाला साझी मुझे मिल गया. साथ स्कूल जाते थे साथ पढ़ाई करते थे साथ मे लंच, साथ मे खेल साथ मे स्कूल का काम करते थे. स्कूल बदल गया सब्जेक्ट बदल गए अलग राहों पे आना -जाना हो गया कुछ ही सालो बाद तू मुझसे भी लम्बा हो ... »

आतिशबाजी

वो आतिशबाजी किस काम कि जो कानो को बहरा कर दे अगले ही दिन प्रदूषण से वातावरण को धुए से भर दे. मै तो चाहूँ ऐसी लड़ी जलाना कि जिंदगी फुलझड़ी जैसी जगमग हो चाहूँ ऐसा अनार जलाना जिसमे खुशियों कि फुहार पग पग हो. ऐसा फोड़ू मुस्कुराहटो का सुतली बम जो लोगो का दिल उत्साह से भर दे ऐसा जलाऊ उमंगो का रॉकिट जो आसमान रंगबिरगी खुशियों से भर दे. »

दीपावली का अगला दिन

हम अपने घरों का का कोना कोना चमकाते है ताकि अच्छे से मना सके दीपावली का दिन और कितना कूड़ा फैला देते है दीपावली के दिन ही दिन. छिड़कते है गंगाजल वातावरण स्वच्छ बनाने को ताकि घर पवित्र रहे दीपावली के दिन और इतने पटाखे फोड़ते है कि धुआँ धुआँ कर देते है दीपावली के अगले ही दिन. काम से छुट्टी करके मनाते है दीपावली का दिन तीन गुना गाड़ियां भगाते है सड़को पर दीपावली के अगले ही दिन. देश का सबसे बड़ा त्यौहार है ... »

औरत

औरत तेरी कहानी जैसे बहता पानी महानता तेरी जगमानी वेग है तू जबरदस्त तूफानी. पर्वतों मे तू नदी वेगवाहिनी मैदानों मे तू स्थिर विरानी खेतो मे तू अन्न गर्भ धारणी महान होकर भी तू सदाचारणी. धरातल मे तू पाताल वासनी पालन करे तू पालनहारिणी गृह उद्धारक तू ह्रदय वासनी सृष्टि का आरम्भ तू और जग कल्याणी. »

चुनाव प्रचार

गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है जब दाल ना गले उनकी, हमपर धर्म प्रहार वो करते है. हिन्दू कहे, मै जीत गया तो मंदिर मै बनवाऊंगा मुस्लिम कहे, मै जीत गया तो मस्जिद मै बनवाऊंगा बेवकूफ़ अच्छे से बना सकता हूँ तुमको जीतने के बाद ठेंगा तुम्हे दिखाऊंगा. चाहे कोई भी जीते जनता जरूर फंसती है कभी बिजली की कटौती कभी... »

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