khwahishen

सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर,
एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….

Comments

3 responses to “khwahishen”

Leave a Reply

New Report

Close