जहा विधा को उम्मीद समझा जाए
यूवा को देश की नीव समझा जाए
चलो ऐसा एक मजहब बनाया जाए
जहां ईनसान को ईनसान समझा जाए
majhab
Comments
14 responses to “majhab”
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क्या बात कही है
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काश ऐसा हो जाये
इंसान सिर्फ इंसान बन जाए -

वाह
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Waah
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Wow
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impressive
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वाह सराहनीय
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thenk u sir g
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Waah
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धन्यवाद
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Superb
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Nice
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वाह बहुत सुंदर
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Good
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