Amrita Dabi
आदमी आदमी हैं
July 13, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
आदमी आदमी हैं
हर जगह
पर क्या कभी
एकता आयेगी
रात भी,
बात भी,
बीत ही जायेगी
पर क्या कभी
राह कोई आयेगी
बैठ गया हूं मैं
May 28, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
थक कर अब बैठ गया हूं मैं
तुम्हें भुलाना कुछ मुश्क़िल हो रहा है
मैं निःशब्द था
May 28, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
उन जानवरों के सामने मैं निःशब्द था
क्योंकि
मैं भी एक इंसान था ।