जूनून – काश सपने मैं जी लू
June 15, 2020 in Poetry on Picture Contest
बेवजह ख्वाब को हम जिए जा रहे हैं
हकीकत को धोखा दिए जा रहे हैं
पता है मयस्सर, न होंगी ये ख्वाहिश
मगर कोशिशें हम, किए जा रहे हैं
मिली मुफ्त में है, ये नींदे ये ख्वाहिश
अगर टूटी ख्वाहिश, बेशक न रोना है
खुलेगी जब आंखें, जनाब
सामना हकीकत से ही होना है
✍️स्वरचित कविता-प्रिया वर्मा