अपनी इच्छाओं को दबाते चले गए
मेरे सपनो को अपना बनाते चले गए
मुझे कभी अहसास भी नही कराया
कि वो अपने ख्वाब छुपाते चले गए
मेरे ख्वाबों को पंख दिए
उड़ने के नए रंग दिए
रूठी कभी तो मनाया भी
नींद न आई तो सुलाया भी
कठिनाइयों में हाथ कभी छोड़ा नही
मुश्किलों में साथ कभी तोड़ा नही
डरी तो गले से लगाया आपने
मुझे पसंद नही कहके, खिलाया आपने
मम्मी की डांट से बचाया भी है
पर अपनी मीठी डांट से समझाया भी है
डर लगता है आपके आसुओं से
आखिर कार दुनिया से बचाया भी है
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